न जाने क्यों – सचिन ओम गुप्ता

न जाने क्यों – सचिन ओम गुप्ता

बात उन दिनों की है जब मैं कालेज में पढ़ता था| एक दिन मैं कालेज से जल्दी घर आ गया था कुछ तबियत ठीक नही लग रही थी मेरी, घर पहुँचते ही मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया, और मोबाइल में ईयर फोन लगा कर मैं गाने सुनने लगा, गाने सुनते-सुनतें कब मेरी आँख
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नोंक-झोंक – सचिन ओम गुप्ता

कुछ भूंख सी लग रही है कुछ बना दो खाने को | टाई की नॉट ढीली करते हुए करन ने कहा| निशा अरे खुद बना लो कुछ| मैं कुछ आर्टिकल लिख रही हूँ | आज एक अख़बार को भेजना है, अभी-अभी कुछ देर पहले अख़बार के एडिटर रहमत भाई का फ़ोन आया था, की जल्दी
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औरत कोई वस्तु नही – नेहा श्रीवास्तव

हमारे समाज मे औरत का अस्तित्व क्या है. क्या आप समझ पाये है कि औरत क्या है. क्या ये पुरुष प्रधान समाज समझ पाया है औरत क्या है . ये समाज तो औरत का मतलब तक नही समझ पाया . आज भी हमारे समाज मे औरतो को वो सम्मान नही मिल पाया है जिसकी वो
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एक आलोचना – प्रवीण चारण

बृजमोहन बैरागी का चिंतन —————————————- एक यतार्थ आलोचना  – प्रवीण चारण बृजमोहन स्वामी ‘बैरागी’ (जन्म 1 जुलाई सन् 1995) , हिंदी प्रगतिवाद-यतार्थवाद के युवा लेखक और कवि हैं। इस वर्ष आगामी जुलाई में ‘बैरागी’ जी का तेईसवां जन्मदिन भी आ रहा है। ‘बैरागी’ जी आधुनिक काल के युवा वर्ग में महत्वपूर्ण प्रगतिवादी लेखक हैं। यह
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आधुनिक भारत {ARTICLE-HUKAM SINGH MEENA}

फिल्मचेष्टा इश्कध्यानम् घोरनिद्रा तथैव च। मुर्गाहारी बोतलधारी विद्यार्थी पंच लक्षणम्|| आधुनिक विधार्थी जीवन के पांच लक्षणों की पुष्टि भारतीय किसानों के बीए, बी एड, शिक्षा धारी व्हाट्स एप्प ग्रुपों के एडमिन पुत्रों द्वारा की गयी है। श्लोक को युग में एवं स्वयं के साथ घटित घटनाओं के आधार पर रचा है। यही एक कारण है
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New Hindi Story: दूध की लालसा – कहानी (विजय सिंह मीणा)

New Hindi Story: दूध की लालसा – कहानी (विजय सिंह मीणा) बाण गंगा नदी पूरे उफान पर थी । उसके दोनों किनारों पर दूर दूर तक अथाह जल राशि दिखाई दे रही थी । सावन-भादों के महीने में हर साल यह अपने पूरे यौवन पर होती  है । आसपास के खेत ज्वार और बाजरा की
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किसान की दुर्दशा। लेखक : हुकम सिंह मीना

गाँव,राज्य,देश,समाज,और विश्व की रीद प्राचीन समय से किसान को माना जाता रहा है। हिन्दुस्तान अपने आप में कृषि प्रधान कहा जाने वाला देश रहा है।देश के विकास को एक नूतन रूप देने हेतु किसान को ही सबसे अहम भूमिका में माना जाता है।जिस तरह एक पिता अपने पूरे परिवार का ख्याल रखता है उसी तरह
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