हमारे समाज मे औरत का अस्तित्व क्या है. क्या आप समझ पाये है कि औरत क्या है. क्या ये पुरुष प्रधान समाज समझ पाया है औरत क्या है . ये समाज तो औरत का मतलब तक नही समझ पाया . आज भी हमारे समाज मे औरतो को वो सम्मान नही मिल पाया है जिसकी वो हकदार होती है. इस दकियानुसी समाज ने औरतो को त्याग की मुरत बनाकर छोड दिया है.एक औरत बेटी होती है ,बहन होती है,पत्नी होती है माँ होती है उसे कई किरेदार निभाने पडते है. वह इंसान भी होती है. उसका खुद का भी अस्तित्व है .सारे त्याग उसी को क्यो करने पडते है? पिता के घर मे स्वछन्दता से जिती है.पति के घर मे क्यो नही जी पाती.क्यो उसको अपनी ख्वाहिशो का हनन करना पडता है. क्यो वह पति के सिर्फ अधीन होकर रह जाती है. औरत सिर्फ स्पर्श की वस्तु नही एक सुखद अनुभुती होती है. आज औरत नही तो ये संसार नही होता. एक पुरुष जो सम्मान अपनी बहन को देता है वह राह चलती स्त्री को क्यो नही देता. एक बार सम्मान कि नजर से देख कर देखो. औरत वह जजबा है जो इतिहास बदल दे. एक औरत को पुरुष कि तरह सम्मान मिलनी चाहिये. वह जननी है तो अंत भी.औरत बुंद है तो समन्दर भी. चेहरे पर बिना शिकन लाये खुशी के साथ अपनी किरेदार अदा करती है. जिस दिन एक पुरुष औरत को अपने अधीन ना समझकर उसको इज्जत देना शुरू कर देगा ,मेरा दावा है दुनिया कुछ अलग ही नजर आयेगी.सारी खूबसूरती तो नजरो मे होती है औरत तो सिर्फ औरत होती है.

Neha Srivastavaनेहा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश (बलिया)

औरत कोई वस्तु नही – नेहा श्रीवास्तव
5 (100%) 1 vote

Leave a comment

Leave a Reply