न जाने क्यों – सचिन ओम गुप्ता

Get Website for Your Business, we're here for you!
DishaLive Web Design & Solutions

न जाने क्यों – सचिन ओम गुप्ता

बात उन दिनों की है जब मैं कालेज में पढ़ता था| एक दिन मैं कालेज से जल्दी
घर आ गया था कुछ तबियत ठीक नही लग रही थी मेरी, घर पहुँचते ही मैं
अपने कमरे में जाकर लेट गया, और मोबाइल में ईयर फोन लगा कर मैं गाने
सुनने लगा, गाने सुनते-सुनतें कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही नहीं चला|
कुछ समय के बाद न जाने क्यूँ मुझे ऐसा लगा की मैं कालेज के लिए तैयार हो
रहा हूँ और जैसे ही मैं घर के बाहर निकलता हूँ
मुझे कुछ लोग परेशान से दिखाई दे रहे थे, किसी भी शख्स के चेहरे में किसी
भी प्रकार की कोई ख़ुशी उल्लास नहीं दिख रही थी| मैं कुछ दूर आगे बढ़ा जहाँ
मेरे कालेज की बस आती है, कुछ देर इंतजार करने के बाद बस आयी और मैं
बस में
चढ़ा वहां देखता हूँ की कोई भी लड़का- लड़की मुझसे बात ही नहीं कर रहा है
किसी के चेहरे में कोई ख़ुशी नही एक दूसरे से कोई बात भी नहीं कर रहा था,
ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे की सब को साँप सूंघ गया हो|

कुछ देर बस में बैठने के बाद मैं अपने आप से कुछ सवाल पूछता हूँ…….
आखिर सबको क्या हुआ होगा…?
कोई एक दूसरे से बात क्यों नही कर रहा…?
मैं क्यों परेशान हूँ…?
मैं कुछ देर सोचता हूँ इन सारी बातों के बारे में फिर मुझे पता चलता है की
अपने सुख-दुःख का कारण तो खुद हम ही हैं लेकिन हम उदास क्यों होते है?

Get Website for Your Business, we're here for you!
DishaLive Web Design & Solutions

क्या होता है जब हम किसी लक्ष्य को करने की ठान लेते हैं और उस लक्ष्य को
प्राप्त नही कर पातें तो हम दुखी हो जाते हैं, और सुख को महसूस नहीं कर
पाते, फिर हम दुःख को निमंत्रण देते जाते हैं और फिर हम मायूस हो जाते हैं |
हम रोज अखबारों पत्रिका में पढ़ते है की उस लड़के- लड़की ने फांसी लगा ली
और हम परेशान हो जाते हैं|

अब मैंने अपने आप से इसका समाधान पूछा…?
फिर कुछ समझ आया की हम सब को अपनी मानसिकताओं और व्यवहार का
मूल्यांकन करना होगा और व्यवहार में परिवर्तन करना होगा| अब हमें अपने
व्यक्तित्व का विकास करना होगा फिर हमें कोई भी व्यक्ति परेशान नहीं
दिखाई देगा| फिर हम नहीं कहेंगे की न जाने क्यों वह परेशान है|

कुछ समय के बाद मेरी शाम को नींद खुलती है और मैं देखता हूँ की मेरे आस-
पास कोई था ही नहीँ मैं ये सारी बाते सपने में देख रहा था लेकिन न जाने क्यों
ऐसा लगा की यह सब हकीकत में हो रहा था|
खैर कुछ सपने कभी कभी कुछ जीवन से जुडी बाते सिखा जाते हैं और हमारे
व्यक्तित्व व व्यवहार में परिवर्तन छोड़ जाते हैं|
मैं एक बात को फिर से दोहराता हूँ |
हमें व्यक्तित्व का विकास करना होगा फिर हमें कोई भी व्यक्ति परेशान नहीं
दिखाई देगा| फिर हम कभी नहीं कहेंगे की न जाने क्यों वह परेशान है|
जीवन को उदासी के दलदल से बाहर निकलना होगा और अपने जीवन को
सहज बनाना होगा|

सचिन ओम गुप्ता
चित्रकूट धाम (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा- स्नातक इंजीनियरिंग- संगणक विज्ञान, उत्तीर्ण- प्रथम श्रेणी, सत्र-2014, कालेज- टेक्नोक्रेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल (मध्य प्रदेश)
संपर्क सूत्र- 07869306218
ईमेल: sachingupta10nov@gmail.com

न जाने क्यों – सचिन ओम गुप्ता
5 (100%) 1 vote

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account