राजनीति- आनंद मिश्रा

राजनीति- आनंद मिश्रा

आम नागरिक स्तर पर कोई विशेष प्रकार का नियम और व्यवहार राजनीति कहलाती है। अधिक संकीर्ण रूप से कहे तो शासन में पद प्राप्त करना या सरकारी पदों का उपयोग करना राजनीति है। राजनीति में बहुत से रास्ते अपनाये जाते है। आम लोगों की समस्या जैसे सामाजिक न्याय, शिक्षा और रोजगार, शासन – प्रशासन में
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पहला कदम-पिंकू कुमार

ना जाने क्यों ना चाहकर भी हम सामाजिक कुरीतियाँ बार -बार करते है जहाँ लिखा है मूत्र त्याग मना है वहीं पेशाब करते हैं अपनी बहन की शादी हो रही हो तो दहेज प्रथा को पाप की संज्ञा देते है जब अपनी शादी हो रही हो तो हम दहेज के प्यासे हो जाते है चलचित्रों
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विचार- दिव्यानि पाठक

कोई लकड़ी का स्तंभ नहीं जिस पर की कठोर आरी चलती हैं। ये जिंदगी हैं जो सहायता के आधार पर चलती हैं।     दिव्यानि पाठक सीहोर,मध्य परदेश  0

आखिर सत्य -हेमा पांडे

एक बार सुकरात अपने शिष्यों को ज्ञान दे रहे थे और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी कर रहे थे, जब वे अपनी बात समाप्त कर चुके थे, तो उन्होंने अपने शिष्यों से कहा यदि किसी के मन में अब भी कोई संशय या प्रश्न शेष हो तो वह पूछ सकता है, यह सुनकर एक शिष्य
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बच्चियों की सुरक्षा सबसे बड़ा प्रश्न-पूजा पत्नी

पोशम पा जी पोशम पा शैतानों ने क्या किया फिर एक छोटी बच्ची की इज़्जत लूटी, उसे तड़पाया उसे मौत के मुँह तक पहुँचाया क्या उसको जेल में जाना पड़ेगा। जेल की रोटी खानी पड़ेगी। जेल का पानी पीना पड़ेगा। आप सबको यह खेल याद होगा। जब हम छोटे थे और अब भी यह खेला
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दस्ता – निशा

हाल ए दस्ता हम किसी का क्या जाने हम तो नाचे ऐसे फ्हेर में कि खुद एक दस्ता बन गये जो किसी की लबों की दस्ता ना बन सकी —निशा 0

Quotes By Divyani Pathak

नेक कर्म ही जीवन में विशेष है। मृत्यु उपरांत बचता कहा शरीर का अवशेष हैं। परिस्थितिनुकूलता की शिक्षा हिमखंड़ो से लो।जो ईर्ष्यावश कभी सूर्य से जलते नही अपितु उसकी किरणो के पृचंड़ अग्नि पृहार से पिघलते है।फिर समय के ही भाव में अपनी पूर्व अवस्था में बदलते हैं । स्वप्न ना मंणराओ इर्द गिॅद मेरे
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आज -कल की शादी – मुनमुन सिंह

आज -कल की शादी का हैं जमाना बदल गया छोरीया हैं बिकने लगीं सोने के भाव में । कब तक ये बिकेंगीं । खरीदने वाले दानव अब तो हो जाओ सावधान । क्या तुम लोगों के नहीं हैं पैसा । आज -कल की शादी का है जमाना बदल गया कब तक सहेंगीं ये भाव बेटियाँ।
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पकड़ लो डोर – मुनमुन सिंह

अब देश में बढ़ता जा रहा हैं आतंक डोर छुटती जा रहीहै । पकड़ लो इस डोर को । पकड़ी नहीं ये डोर । खत्म हो जायेगा ये देश । अब देश में बढ़ता जा रहा हैं आतंक बच्चे भी बन रहें हैं आतंकवादी । युवाओं की बात छोड़ दो । भविष्य में लोग भी
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हैं बनी – मुनमुन सिंह

मेरी जिन्दगी न जाने किस सीसे टूकड़े से हैं बनी । रहती हूँ मै हमेशा बीमार बचपन से सोचती I. A.Sबनते हैं कौन । कविता लिखी जाती हैं कैसे । मैं अपना लक्ष्य भी बना ली इसी को। मेरी जिन्दगी न जाने किस सीसे टूकड़े से हैं बनी । आज मैं आर्ट ले ली अपने
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