किसान पर कयामत – पपुल कुमार यादव

किसान पर कयामत – पपुल कुमार यादव

रीढ़ की हड्डी जो कहलाते हरा-भरा हिन्दुस्तान की । फो‌ड़ दी किस्मत सब कोई मिलकर धरती के भगवान की ।। सारे भारतवासी का वह रोज जो भूख मिटाता है । कह पाता वह नहीं किसी से जब भूखा सो जाता है ।। कभी न हक मिल पाता उन्हें सरकारी सम्मान की । फो‌ड़ दी किस्मत
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हम बिटियाँ – पूजा दास

हम बिटिया है देश का मान हम से ही है देश का सम्मान बदलो अपनी सोच को सामने रखो एक लक्ष्य को दिखा दो उन लोगों को कि नन्ही बिटिया क्या कर सकती है बिटियओ ने करना है संघर्ष वो है इस देश की रक्षक हम बिटिया कमजोर नही दुसरो पर भरोसा अब ओर नही
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प्रेम का मंत्र – सनत बघेल

विशाल नदी का पुल ना रोक पाये तुम नदी सुखे धार का पानी ! मैं तुझमें होकर बहता हूँ तुम उमड़ती मौजो की रवानी !! वीणा माता के चरणो को छुए तुम मन सुगंध सुहानी ! मैं सफेद किचड़ का राजा हूँ तुम अति सुदंर फूलो की रानी !! मन को शीतल सीख देते तुम
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बहुत स्नेह है संघर्ष तुमसे – दिव्यानि पाठक

बहुत स्नेह है संघर्ष तुमसे । मिट्टी से ईट बना हु तुमसे । अंकुर से वृक्ष बना हु तुमसे । पृत्येक स्थिति का ज्ञान पाया तुमसे । अपनों को पहचान पाया तुमसे । खुदको तलाश पाया तुमसे। अनुभववान बन पाया तुमसे । आज क्यु रूठ गये तुम मुझसे। वृद्धावस्था देख डर गये तौम मुझसे ।
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कुणाच्या सांगण्यावरुन आपल्या मनात –

कुणाच्या सांगण्यावरुन आपल्या मनात एखाद्या व्यक्तीबाबत चांगले वा वाईट मत बनवण्यापेक्षा, आपण स्वतः चार पावले चालुन समोरासमोर त्या व्यक्तीशी संवाद साधुन मगच खात्री करा. नाती जपण्यासाठी संवाद आवश्यक आहे … बोलताना शब्दांची उंची वाढवा आवाजाची उंची नाही. कारण.. पडणाऱ्या पावसामुळे शेती पिकते, विजांच्या कडकडाटामुळे नाही.. आणि वाहतो तो झरा असतो आणि थांबतं ते डबकं असतं..
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ऐ लिखने वाले लेखक – पूजा चौहान

तेरे लिए हर एक शब्द एक सीप का मोती है इसे पढ़ने वालों के लिए वो एक दीप की ज्योति है। शब्दों का चुनाव ठीक से रखना भावनाओं का इजहार सटीक से करना। अक्षरों को कभी अपने, खुद से रुसवा ना करना बातों से अपनी कभी किसी को खफा ना करना। काफिया मिलाने के लिए
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जिसकी धुन पर दुनिया नाचे,दिल ऐसा एक तारा है – राकेश चतुर्वेदी

जिसकी धुन पर दुनिया नाचे,दिल ऐसा एकतारा है। झूम रही है पाने को सारी दुनिया,वो ग़ज़ल हमारा है कौन समझे मेरे दिल की बात,बताओ तो जरा, जिस सीने में सांस ले रही है,ओ भी हमारा है। रात दिन कोशिश करता रहा,पाने के लिए उसे। नदिया तभी बहती है,जब साथ उसके किनारा है।। हर फूल खुशबू
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चुनौतियों का सामना तो करना पड़ेगा – शोभा(सृष्टि)

चुनौतियां चारों ओर सिर उठाये खड़ी हैं इन चुनौतियों से पार पाना मुश्किल हुआ है चुनौतियों की श्रंखला का पैमाना बढ़ता जा रहा है समय अपनी गति से कटता जा रहा है चुनौतियों का सामना तो करना पड़ेगा उनकी जीत के लिए अंदर तक तपना पड़ेगा। चाहे अंदर से उबल रहे है, लेकिन जमाने में
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एक छोटी सी बात क्यों लोग समझ नही पाते है – दिव्यानि पाठक

एक छोटी सी बात क्यों लोग समझ नहीं पाते है। क्यो पाश्चात्य संस्कृति पर इतना मंत्रमुग्ध हो जाते है । आधुनिकता से परिचित एक शहर था । पाश्चात्य संस्कृति से मोहित वहा का माहौल था । नवीनता के नशे मै भूले लोग अपने संस्कारो को । देखो अब पाश्चात्य देशों , जैसे उनके अवकाशो को
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व्यथा जन की , पृभा मन की – दिव्यानि पाठक

कैसी व्यथा है ,ये जन की । जो सुन लेते है, मन की निचोड़ देता है, ये उसको । जो सुनता है, इसको । खुशबू तो देता है,ये रंग का । जो साथी नहीं है, संग का । ड़ूबो देता है , ये उसको । जो सुनते है, इसको । कैसी व्यथा है, जन की
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