साहित्य की इस दुनियाँ को युवा झकझोर गए
कितने लेखक दुनियाँ में छाप अपनी छोड़ गए
लोग साहित्य खो रहे या कविता अपनी अहमियत
साहित्य ने इस दुनियाँ को लेखक दिया अनगिनत
आज के इस दौर में, गुमनाम हो रही है कविता
अस्तित्व बचाने के लिए अब रो रही है कविता।

मोबाईल के दौर में खाना खाने की फुर्सत नहीं
हाय हेल्लो चलता है, इस ज़माने में ख़त नहीं
आधुनिक समाज में, सब कुछ ठीक ठाक नहीं
प्रदूषण फैलाने के सिवा, किया कुछ खास नहीं
पेड़ो ने क्या बिगाड़ा जो उनको तुम काट रहे हो
आधुनिकता के नाम पर जहर तुम बाँट रहे हो
प्राकृतिक को उजाड़ा, तुमने नदियों को रोक दिया
काव्य और साहित्य को भी आग में झोंक दिया
साहित्य की आगोश में अब सो रही है कविता
अस्तित्व बचाने के लिए अब रो रही है कविता।

शोर का कोहराम है, हर तरफ अंधविश्वास है
व्यस्त इस ज़माने में जिसे शांति की तलाश है
शांति तो अब मरने के बाद भी नही होती
जनाजे में भी किराये की महिलाये हैं रोती
शांति मिलती है मुझे, बिना बने कोई हस्ती में
गजलो की गलियों में, कविताओ की बस्ती में
बागडोर साहित्य की अब युवाओ के हाथ में है
इसे बचाना है तो हम इस धरोहर के साथ में है
साहित्य मुझको भाया इसिलिये मैं सिखता हूँ
मुझे कोई मोह नही फिर भी मैं लिखता हूँ
काव्य की धरोहर को संजो रही है कविता
फिर भी अस्तित्व बचाने को अब रो रही है कविता।

लिखता हूँ लिखने से सुकून मुझे मिल रहा है
साहित्य की धरती पर फूल नया खिल रहा है
मेरे जैसे कलमकारों को बो रही है कविता
काव्य की धरोहर को संजो रही है कविता
फिर भी अस्तित्व बचाने को अब रो रही है कविता।

© राहुल रेड
फर्रुखाबाद
8004352296

कविता
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