खाली कन्धे हैं इन पर कुछ भार चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए
जेब में पैसा नही डिग्री लिए फिरता हूँ
दिनो दिन अपनी ही नजरो में गिरता हूँ
कामयाबी के घर में खुले किवाड़ चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए।

दिन रात एक करके मेहनत बहुत करता हूँ
सूखी रोटी खाकर ही चैन से पेट भरता हूँ
फिर भी न जाने क्यों ठुकरा दिया ज़माने ने
भरोसा नही किया मेरा टैलेंट आजमाने में
भ्रष्टाचार से लोग खूब नौकरी पा रहे हैं
रिश्वत की कमाई खूब मजे से खा रहे हैं
नौकरी पाने ले लिए यहाँ जुगाड़ चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए।

टैलेंन्ट की कमी नही भारत की सड़को पर
दुनियाँ बदल देगे भरोसा करो इन लड़कों पर
लिखते-लिखते मेरी कलम तक घिस गयी
नौकरी कैसे मिले जब नौकरी ही बिक गयी?
नौकरी की प्रक्रिया में अब सुधार चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए।

मुझे रोजगार चाहिए by राहुल रेड
Rate this post

2 Responses

Leave a comment

Leave a Reply