बेटियां – सोनम सिंह

साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात प्रतिभागियों को 501/- रुपये प्रति व्यक्ति

बेटियां – सोनम सिंह

आंगन खेलने की उम्र, ना जाने कब गबाइ।
बेटियां क़्यो होती है, दुखों की परछाई।।
हर गम, हर तकलीफ, झेलती है बेटियां ही।
हर कुर्बानी, हर त्याग, देती है बेटियां ही।।
अपने परिबरो के लिए, मर मिटती है बेटियां ही।
हर कदम पर साथ, देती है बेटियां ही।।
ना जाने फिर भी क़्यू, पराई होती है बेटियां ही।।

Sonam Singhसोनम सिंह,
पटना (बिहार)

बेटियां – सोनम सिंह
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  • Beautiful lines👌👌

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