एक गुजारिश- शुभम लाम्बा

साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात प्रतिभागियों को 501/- रुपये प्रति व्यक्ति

एक गुजारिश- शुभम लाम्बा

बैगेरत सी है, ये जिन्दगी तेरे बिना
फ़िक्र तो इस बात की है, क्या होगा तेरा मेरे बिना।
कह तो रही हो, कि अब भूल भी जाओ मुझे।
सोच लो फिर से क्या? सूकून मिलेगा तुम्हें मेरे बिना।
एक बात कहूं, मत करो परवाह इस दुनिया की
क्योंकि तुमने कसमें खाईं हैं,मेरे साथ जिने-मरने की।
तुम्हारे ज़हन में सिर्फ एक ही प्रशन, कि लोग क्या कहेंगे?
मेरा दिल कहता है कि, हम ही मोहब्बत की मिसाल बनेंगें।
अब बस भी करो, लौट आओ ना मेरी जिंदगी में।
क्योंकि मैं और नहीं जी पाऊंगा इस तन्हाई में।
सच कहूं तो आज बहौत याद आ रही है तुम्हारी
क्योंकी मौसम भी इसी इत्तफाक में, आज मुलाकात होगी हमारी।
वो तो समझ ही गया है मेरी बैचेनी को, तुम भी समझ लो ना।
कि मुझे नहीं जीना इस दुनिया में तुम्हारे बिना।
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Subham Lambaशुभम् लांबा 

एक गुजारिश- शुभम लाम्बा
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