मानव का है भीड़ जहाँ,
रहते जहा पांछियो का बास्।
पेड़ पौधे जिस धरा पर रहते,
लालिमा बिखेरती जहाँ आसमान।
अपने जीवन का निर्माण, जो करता
यही है हमारा संसार।
स्वर्ण बर्ण से दिन लिख जाता,
जब अपने जीवन का हार।
हँस देता जब प्राण सुनहरे,
आंखों मे लिए सपनो की धार।
छलकी पलको से कहती है,
कितना मादक है संसार।
लहरो की धारो पर जब,
मचल पड़ती भोली किरने।
स्वपन लोक के फूलो से कर,
अपने जीवन का निर्माण।
बीते युग पर बना हुआ है,
अब तक मतबला संसार।।

Sonam Singhसोनम सिंह,
पटना (बिहार)

हमारा संसार – सोनम सिंह
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