कितना सुन्दर , कितना चंचल ,तू कितना अच्छा है
रे मन फिर क्यों तू इतना घबराया है …
तू हँसता है , सब हँसते हैं ,
तेरे पापा, तेरी मम्मी तूझको कितना दुलराया है
रे मन फिर क्यों तू इतना घबराया है …
जब कल तू नाराज था तेरे भइया न तुझको हँसाया है
रे मन फिर क्यों तू इतना घबराया है …
तू माँ की जान है, पापा का अभिमान है
तू जब-जब आंगन में खेला,
सब चेहरे में खुशियोँ का मेला
कितना सुन्दर , कितना चंचल ,तू कितना अच्छा है
रे मन फिर क्यों तू इतना घबराया है …
रे मन फिर क्यों तू इतना घबराया है …

Sachin Om Guptaसचिन ओम गुप्ता,
चित्रकूट धाम

रे मन फिर क्यों तू इतना घबराया है – सचिन ओम गुप्ता
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