कुछ लिखुं तो बहुत कुछ कह जाते है मेरे शब्द .
जिसे समझ मे आजाये उसे गहरा दे जाते है मेरे शब्द.
हालात बुरे हुए तो मैने अपना शहर छोड़ दिया,
आँखो मे नमी हो तो कोरे कागज पर उतर जाते है मेरे शब्द.
हर मोड पर मैने खुद को अकेला पाया,
तन्हाई मे बहुत काम आये मेरे शब्द.
जिसकी जैसी जरुरत थी मुझे आजमाया
सबके चेहरे से नकाब गिराये मेरे शब्द.
सफर मुश्किल था और अंजाना भी
बहुत सिद्दत से साथ निभाये मेरे शब्द.

Neha Srivastavaनेहा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश (बलिया)

शब्द – नेहा श्रीवास्तव
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