“कुत्ते का श्राप” – शिव प्रताप पाल

“कुत्ते का श्राप” – शिव प्रताप पाल

एक बड़े शहर में एक छोटी सी नदी बह रही थी, छोटी सी नदी कहने से मेरा तात्पर्य उसकी लम्बाई से नहीं, वरन उसकी चौड़ाई से है| उसकी चौड़ाई यही कोई 15-18 फीट से ज्यादा नहीं रही होगी, अतः देखने में वह नालानुमा जान पड़ रही थी| देखने में उसकी गहराई भी, बीचो-बीच करीब, यही
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फिर तलाक क्यों? – सचिन ओम गुप्ता

“रवि ऑफिस से घर आते ही पत्नी पूजा से बोला-मुझे तलाक चाहिए.. पूजा तलाक शब्द सुनते ही रो पडी 8 साल का रिश्ता दोनों का एक 7 साल का बेटा है फिर तलाक क्यों ? रवि बोला ऑफिस मे रेखा से पिछले 6 महीने से अफेयर चल रहा हैं और हम दोनों अब शादी करना
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कहानी बृद्धाश्रम की…कमल नयन मिश्रा

अरे सुमन देखना जरा बेटा इन जूतों की आवाज़ मेरे बेटे के जूतों जैसी है कही वो मेरे को लेने तो नही आया है कहते हुए बूढ़ी आंखे अपना आपा खो बैठी और धाराओं के जैसे बह चली। सुमन- अरे चंदा चाची अगर तुम्हारे बेटे को तुम्हे लेके ही जाना होता तो बृद्धाश्रम में छोड़
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नारी – जयकृष्णा

नारी नारी शब्द ही रहस्य है इश्क का अब तक कोई तोड़ नहीं है किंतु हमें पूर्वज द्वारा ज्ञात है कि सृष्टि के निर्माण के लिए ईश्वर के द्वारा नर नारी रूप की रचना की गई है तभी से नर के साथ-साथ नारी का अस्तित्व है अस्तित्व की बात है तो यह उल्लेखनीय है कि
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बिल्लू – सरला सिंह

शहर के एक कॉलोनी में एक बिल्ली परेशान -सी घूम रही थी ,उसे सूनसान और खाली जगह की तलाश थी ,जहाँ वह बच्चों का जन्म दे सके और उन्हें सुरक्षित रख सके ।इधर से उधर घूमते हुए उसे एक घर मिल ही गया । घर के पिछले हिस्से में कभी कभी सफाई के लिए ही
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स्वाथ्य सबसे बड़ा धन है – प्रणय कुमार

किसी गाँव में एक आलसी पुरुष रहता था | वह अपने खेत-पतार को छोर कर घर में बैठा रहता था | उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, इसलिए वह बैठे–बैठे ही अपना घर चलता था | महीने बीत गए मगर उसका आलस नहीं गया | उसके आलस के बारे में गाँव के सभी
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I am not a teacher-sujeet-kumar

बुढ़ा खड़ुस माकन मालिक ने मुझे घर से निकल दिया, निकलता भी क्यों नहीं छः महीने का किराया जो बाकि था। घर से पैसे तो आ नहीं रहे थे जो मै  उसको देता,  कब से बोल रहा था दे दो -दे दो पर नहीं, अंत में उसने मुझे निकल ही दिया। उस  खड़ुस पर मुझे
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ऐसा दिन नहीं रहेगा-चन्दन कुमार

यह कहानी सम्पूर्ण रूप से काल्पनिक हैं और यह कहानी एक अस्सी साल का वृद्ध व्यक्ति एक छोटे से बच्चे को सुनाना शुरू करता हैं|( वह लड़का लगभग दस साल का रहा होगा,और वह लड़का उस वृद्ध व्यक्ति को दादू दादू बुलाता था)- जब मैं आज से पचासों साल पहले तुम्हारी तरह छोटा बच्चा था
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आँगन का फूल-नीलम सोनकर

पात्र – 1.      प्रकाश           अध्यापक                       28 2.      माया             प्रकाश की माँ                 48 3.      आरती            प्रकाश की पत्नी   
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नाचती प्रेम पाती-अभी राजा फ़रुर्खाबदी

क्या वो दिन याद करके तुम्हें रोना आता है । क्या बताऊं !  लंबी लंबी सांसे भरते हुऐ  टूटी खाट पर लेटे बाबा घासीदास अबाज लगाते हुऐ कहते हैं,, अरे ! क्या बताऊं लाला राजू तुमका तो आज से ऐ प्रेम का रोग लगा है,, हमतो इसके सारे दरों पे माथा टेक चुके हैं।। वो
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