लेखक: हुकम सिंह मीना बेटा

५:०० बजगये टाइम नही है अभी अगले पार्क भी तो जाना है, एक खूबसूरत महिला बच्चे को गोद में बताते हुए जा रही थी, आज 31 दिसम्बर है सबको ख़ुशी है १२:०० बजे नया साल शुरू हो जायेगा। मुझे ख़ुशी तो है लेकिन दुःख ये है कि आज मेरे मोबाइल की साल गिराह है, आज इसकी वारण्टी समाप्त हो रही है, समझ ये नहीं आ रहा की नया वर्ष सेलिब्रेट करूँ या मोबाइल की वर्षगांठ मनाऊ। जी तो करता है कि घड़ी के काँटों को पकड़ लूँ, लेकिन एक दिन तो वो भी छोड़ने पड़ेंगे ना। फिर क्या इन खूबसूरत ईश्वर की मूर्तियों के साथ जाकर नाचूँ, ये भी ठीक से नहीं हो पाया तो भी मुश्किल ही होगी, खैर जो करना होगा कर लूंगा अब तुम्हे एक पते की बात पर लाता हूँ, सब कह देते हैं एक पल को कि प्यार करना कोई बुरी बात नहीं है वैसे ठीक भी है कर लेना चाहिए। लेकिन प्यार के नाम पर तुम इस पवित्र शब्द “प्यार” को गंदा करते हो क्या ये ठीक है।

मोनिका को शहनाज के साथ इसलिए ही तो पकड़ रखा है इन कॉलोनी वालों ने, इन दोनों का कहना है कि वो प्यार करते हैं, कॉलोनी कहती है कि ये बुराइयां और बीमारियां दोनों फैला रहे हैं। मैं इन दोनों को सपोर्ट तो नहीं करूंगा, दोनों अपनी अपनी जगह ठीक ही हैं। लेकिन ये प्रजनन के लिए दिए गए अंगों से ढाई आखर “प्यार”को बदनाम जरूर कर रहे हैं, इनको देखकर कुछ लोग आपस में बात कर रहे थे, भाई हिन्दुस्तान बहुत खराब है इससे अच्छा तो बैंकॉक है जहां खुले आम चाहो तो लगे रहो, रुस्सियन के साथ या कोई भी कुछ भी करलो सड़क पर भी कोई कुछ नहीं कहता, i like Bangkok. कह कर निकल गया। लेकिन आपको बता दूं यदि आप सोच रहे हो की बैंकॉक is batter to इंडिया तो आप गलत हो, इंडिया को बुरे कामों से वर्ल्ड के लोग नहीं जानते, वो सिर्फ इसे बेहतर संस्क्रति, शर्म,ह्या,और लज्जा से जानते हैं यहां की संस्क्रति वो है जो किसी अन्य देश में कभी लागू हो ही नहीं सकती, एक औरत अपने पति के अलावा किसी पराये मर्द का ख्याल भूल कर भी दिमाग में नहीँ ला सकती, रामायण जैसे एपिशोड के लिए यहां के बेहतर परिवार को दिखाया जाता है ना की किसी परिवार से रामायण का एपिशोड बनाया जाता।

बाबा तुलसीदासजी अपनी महान रचना रामायण जैसे पवित्र ग्रन्थ में सर्वश्रेष्ठ भारत की इज़्ज़त महिलाओं ४ वर्गों में बताया है: उत्तम, माध्यम, नीच, लघु। उत्तम प्रकार की वो महिलाएं होती हैं जिनके मन, सोचने में भी कोई पराया व्यक्ति नहीँ हो सब कुछ सिर्फ पति, उन्हें उत्तम वर्ग की महिला कहते हैं। मध्यम वर्ग की वो महिला होती हैं जो पति को पति, भाई को भाई, ससुर को पिता की दृष्टि से देखती हैं, मध्यम वर्ग की महिलाएं कहलाती हैं। नीच वर्ग की वो महिलाएं होती हैं जो मान , मर्यादा को नजर रखते हुए पराये मर्द के लिए, अपने पति को धोखा दे देती हैं।  “लघु वर्ग” की औरतें आपको ये प्रवृत्ति की महिलाएं आम रूप से कहीं न कहीं कलियुग की इस नई जनरेशन में देखने को मिल जाएंगी, जैसे हमारी गतिशील कहानी की मोहतरमा मोनिका जी अन्य इस प्रवृति में शादी शुदा महिला कम उनकी जगह नई नई कन्याओ ने जो ले ली है।

कितना भी कह लो सब कम है, गालियां आप ही दे सकते हो, मैं नहीँ। ये अपने आप को चतुर और चालाक कहने वाली महिलाएं होती हैं, लेकिन खास बात हमारे सोचने तक और बाबा तुलसीदास जी के कहने तक “ये क्षण मात्र के सुख ,आनंद के लिए पराये मर्दों से रति कर बैठती हैं। फिर अपने आप को सती सर्वश्रेष्ठ मानने लगती हैं।” अरे हाँ ! मोहतरमा आप भी मेरी पाठक हो माफ़ी नहीँ ले सकता आप से क्योंकि मेरी कहानी को पढ़ने वाली महिला उत्तम वर्ग की महिला है। मैं ऐसा मानता हूँ, चलो आप कुछ बुरा भला कहो अपने टॉपिक पर आ जाता हूँ, मित्रों उत्तम, मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए हिन्दुस्तान जाना जाता है, नीच और लघु के लिए तो आपका बैंकॉक जाना जाता होगा। वैसे कुछ लोग और आ जाएं जो मोनिका और शहवाज के प्यार को बढ़ावा देते हों तो हिन्दुस्तान को बैंकॉक बनने में ज्यादा वक्त नहीँ लगेगा। नई जनरेशन है ये तो आप भी जानते हो हिन्दुस्तान को बैंकॉक बना ही देंगे।। लोग भूल जाते हैं उनसे ज्यादा में भूल जाता हूँ कहाँ क्या लिखना है, “जो महिला अपने पिता, भाई, माँ, भुआ यानि अपनों के सामने अपने पति से घूंघट करती हो उसे उत्तम नारी कह सकते हो। जो महिला किसी पराये मर्द से घूँघट करती हो उसे भारतीय संस्कृति से लथ-पथ नारी कहते हैं। अब आप जो सोच रहे हो वो में भी समझ रहा हूँ, लेकिन चेहरा ढक लेने से और नाभि,नँगापन दिखाने से कोई भारतीय नारी नहीँ हो जाती। चेहरा तो भूसा भरने वाला गरीब आदमी भी बाँध लेता है। मित्रों आगे कुछ ज्यादा नहीं कह सकता समझने वाले को समझदार कहते है, और जो गलत सोच गया उसे “ग” से “गधा” कहते हैं। कहानी का कोई भी अंश आपको पसंद नहीं आया हो तो टिप्पणी भेजकर हमें अवगत कराने की कोशिश करें। दोस्तों मज़ेदार बातें फिर किसी अंक में करूँगा। अभी के लिए आपको नया साल मुबारक , घनी खम्मा, राम-राम।

By:

लेखक : हुकम सिंह मीना; गांव+पोस्ट: जयश्री, तह: नगर, जिला – भरतपुर (राजस्थान)
E-mail – meenahukam1995@gmail.com Contact- +9194149,17919

हिन्दुस्तान को बैंकाक ना बना मेरी जान
5 (100%) 2 votes

2 Responses

Leave a comment

Leave a Reply