संदीप कुमार सिंह 08 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज की सच्चाइयों को प्रस्तुत करती हुई आप पाठक लोगों को सही मार्ग प्रसस्त करेगी. 195 0 Hindi :: हिंदी
सरसी छंद मुक्तक आज जमाना है ऐसा ही,करें दिखावा लोगl सही बात से अनजाने हैं, लगा शौक का रोग l ऐसे में खोते हैं सुख को, दुख से होता अंत= पहले यदि भरो जेब तो तो,करो खूब तब भोग ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....