रमज़ान-उदय प्रताप

रमज़ान-उदय प्रताप

दिलों की दूरिया मीट जाये चलो ऐसे मीले खलिश रहे न कोई मन मे की चलो ऐसे मीले जैसे मीलती है दुआ खुद ब खुद अज़ानो से माहें रमज़ान मे ऐ दोस्त चलो ऐसे मीले   उदय प्रताप  1+

राजा हरिश्चंद्र की मंत्र शक्ति-हेमा पाण्डेय

भगवान राम के पूर्वज सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के जीवन का एक प्रसंग है. एक बार लंका नरेश रावण राजा हरिश्चंद्र की तपस्या से प्रभावित होकर उनके दर्शन करने आया .राजमहल के द्वार पर पहुंचकर रावण ने द्वारपाल को अपनी आने का प्रयोजन बताया और कहा मैंने राजा हरिश्चंद्र की तपस्या और मंत्र साधना के विषय
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हवन-अनिल कुमार सागर

हवन (यज्ञ) के वैज्ञानिक पहलू।* (१)  मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नमक गैस उत्पन्न होती है जो की खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओ को मरती है तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने
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सीता के प्रश्र-उदय प्रताप

हे आर्य पुत्र मर्यादा मय मै पत्नी धर्म निभाउगी!! हर्षित होकर उल्लास से मै ये अग्नि पार कर जाउगी!! पर साबित  इस से क्या होगा क्या तुम मुझको समझाओगे !! जो संशय  मेरे मन मे   है उनका उत्तर दे पाओगे ? तुम भी तो   हमसे दूर रहे ना जाने कहा कहा भटके!! मै विवश तुम्हारी
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दो पीढ़ियाँ करेगी कदमताल – नटवरलाल

दो पीढियां चाहे तो क़दमताल भी कर सकती है वर्तमान समय को तकनीकी दौर के नाम से जाना जाता है । आज के समय नयी पीढ़ी बेहद रफ़्तार के साथ आगे बढ़ रही है वहीं पुरानी पीढ़ी अपने अंदाज में जीना पसंद करती है ! नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच अभी भी बेहद
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भारतीय नारी के नाम ख़त – रक्षित परमार

इस नवरात्र के पर्व पर देशभर की महिलाओं और लड़कियों को एक नहीं बल्कि कई छोटे -छोटे प्रण लेने चाहिए जो नारी सशक्तिकरण को मज़बूती प्रदान करते हो । नारी कन्या भ्रूण हत्या को स्वीकार न कर तीव्र प्रतिरोध दिखाना आरंभ कर दें तो पुरूषवादी समाज को घुटने टेकने में बिल्कुल देर नहीं लगेगी ।
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ज्ञान – हेमा पाण्डेय

कण कण में विष्णु बसें, * * जन जन में श्री राम! * * प्राणों में माँ जानकी, * * मन में बसे हनुमान !! * ✌ * दो चीजों को कभी व्यर्थ * * नहीं जाने देना चाहिए * ….. * अन्न के कण को * * “और” * * आनंद के क्षण को
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हिंदुत्व – जयकृष्ण कुमार

आज इस लेख के जरिए मैं आपको हिंदू धर्म की वर्तमान स्थितियों के बारे में अवगत कराऊंगा । सर्वप्रथम मैं आपको बता दूं कि हिंदू कहीं से विस्थापित होकर भारतवर्ष में नहीं आया. हिंदू ही आर्य के नाम से जाना जाता था इस भारतवर्ष को हिंदू आर्य ने ही बसाया है ,इसलिए इसका नाम हिंदू
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पूजा और साधना भिन्न है – अजय/सौम्या दास

अध्यात्म मार्ग में ‘पूजा’ के साथ-साथ ‘साधना’ शब्द भी मुख्य रूप से सुना जाता है। प्रश्नों के उठता है :- क्या ‘पूजा’ और ‘साधना’ भिन्न है? उत्तर:- हां ‘पूजा’ और ‘साधना’ भिन्न होते हुए भी दामन- चोली का साथ है! उदाहरण :- जैसे हमें जल की अति आवश्यकता है । जब प्यास सताती है तो
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गायत्री बंदना – उदय प्रताप

मुखमंङल तेरा ओज युक्त ब्रह्मांड की अविरलता तुम मे तुम वेदो की अमृत वाणी संताप मिटाने वाली हो मन की जङता को दूर करे वो ज्ञान तुम्हारे भीतर है तुम करूणा की मूरत हो माँ तुम प्राण बचाने वाली हो दुर्गा की शक्ति मे तुम हो मीरा की भक्ति मे तुम हो तुम अखिल विश्व
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