ईश्वर कौन है – सुशिल कुमार शर्मा

ईश्वर कौन है – सुशिल कुमार शर्मा

परमात्मा की प्यारी आत्माओं, भक्ति के क्षेत्र में एक अत्यंत ही जरुरी और महत्वपूर्ण पहलू होता है “गुरु” का जिसके बगैर हम इस संसार सागर से पार नहीं हो सकते| गुरु महिमा के विषय में गोस्वामी तुलसी दास जी लिखते हैं:- गुरु बिन भव निधि तरई न कोई| जो विरंची शंकर सम होई || अर्थात
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कबीर परमेश्वर जी के अनमोल वचन

आध्यात्मिक तत्व ज्ञान सुरति मूल ठिकाना जानो ।। कोई काया ब्रह्माण्ड में खोजे, कोई सुन्न ठहरावे। पिंड ब्रह्मांड दोउ से न्यारा ,कहु कैसे लख पावे।। बिना गुरु कहु कैसे पावे, फिर काया धर आवे। सार शब्द की सनद न पावे, फिर भवसागर आवे। गुरु जौहरी भेद बतावे, ओघट घाट लखावे। सुरति मस्तानी शब्द समानी, गुरु
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कबीर परमेश्वर जी के अनमोल वचन

कबीर मन गोरख मन गोविंद, मन ही औघड़ सोय । जो मन राखै जतन करि, आपै करता होय ।। मन ही योगी गोरखनाथ है, मन ही भगवान है, मन ही औघड़ है अर्थात मन को एकाग्र करके कठिन साधना करने से गोरखनाथ जी महान योगी हुए, मन की शक्ति से मनुष्य की पूजा भगवान की
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कहानी-कलंकी

   सुबह का समय था. सूरज निकला. उसकी स्वर्ण पीताभ किरणें मेरे मुंह पर आ रहीं थी. मैं बड़े आनंद से उनका अनुभव करते हुए नींद की गोद में सिमटने की कोशिश कर रहा था कि तभी मेरी पूज्य माताजी ने मुझे जगाया. बोलीं, “कब तक सोता रहेगा. चल उठ मुंह धो ले और गाँव के
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जानिए.. श्री अमरनाथ धाम की स्थापना कैसे हुई ?

श्री अमरनाथ धाम की स्थापना कैसे हुई :- भगवान शंकर जी ने पार्वती जी को एकांत स्थान पर उपेदश दिया था जिस कारण से माता पार्वती जी इतनी मुक्त हो गई कि जब तक प्रभु शिव जी (तमोगुण) की मृत्यु नहीं होगी, तब तक उमा जी की भी मृत्यु नहीं होगी। सात ब्रह्मा जी (रजोगुण)
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वंदन Poem by विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’

हे सत्य सनातनहे अनंतहे शिव भोलेहे जगत-कंत हे शक्ति नियंतासंघारकहे डमरू,त्रिशूलके धारक हे महादेवहे शिवा पतितव ध्यान मग्नसब योगी-यती ले अतुल भक्तिविश्वास धारमैं रहा आजतुझको पुकार मम् वंदन कोस्वीकार करोइस धरती केसंताप हरो… ***********         < p dir=”ltr”>-विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’           गंगापुर सिटी (राज.)

पवित्र तीर्थ तथा धाम की जानकारी

पवित्र तीर्थ तथा धाम की जानकारी किसी :- किसी साधक ऋषि जी ने किसी स्थान या जलाशय पर बैठ कर साधना की या अपनी आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन किया। वह अपनी भक्ति कमाई करके साथ ले गया तथा अपने ईष्ट लोक को प्राप्त हुआ। उस साधना स्थल का बाद में तीर्थ या धाम नाम पड़ा। अब
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कबीर साहेब के द्वारा विभीषण तथा मंदोदरी को शरण में लेना

कबीर साहेब द्वारा विभीषण तथा मंदोदरी को शरण में लेना :- ??? परमेश्वर मुनिन्द्र अनल अर्थात् नल तथा अनील अर्थात् नील को शरण में लेने के उपरान्त श्री लंका में गए। वहाँ पर एक परम भक्त चन्द्रविजय जी का सोलह सदस्यों का पुण्य परिवार रहता था। वह भाट जाति में उत्पन्न पुण्यकर्मी प्राणी थे। परमेश्वर मुनिन्द्र
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श्री भागवत गीता का ज्ञान किसने बोला जानिये सत्य क्या हैं ?

पवित्र गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नही दिया काल ने दिया था। पवित्र गीता जी के ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध होने जा रहा था।अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया था। युद्ध क्यों हो रहा था? इस युद्ध को धर्मयुद्ध की संज्ञा भी नहीं दी
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कबीर परमेश्वर जी द्वारा गुरु महिमा अमृतवाणी

गुरु ते अधिक न कोई ठहरायी। मोक्षपंथ नहिं गुरु बिनु पाई।। राम कृष्ण बड़ तिहुँपुर राजा। तिन गुरु बंदि कीन्ह निज काजा।। गेही भक्ति सतगुरु की करहीं। आदि नाम निज हृदय धरहीं।। गुरु चरणन से ध्यान लगावै। अंत कपट गुरु से ना लावै।। गुरु सेवा में फल सर्बस आवै। गुरु विमुख नर पार न पावै।।
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