परमात्म रहस्य :: पवित्र गीता जी – प्रदीप दाश

परमात्म रहस्य :: पवित्र गीता जी – प्रदीप दाश

कविः नाम जो बेदन में गावा, कबीरन् कुरान कह समझावा। वाही नाम है सबन का सारा, आदि नाम वाही कबीर हमारा।। सामवेद उतार्चिक अध्याय 3 खण्ड न. 5 श्लोक न. 8 मनीषिभिः पवते पूव्र्यः कविर्नृभिर्यतः परि कोशां असिष्यदत्। त्रितस्य नाम जनयन्मधु क्षरन्निन्द्रस्य वायुं सख्याय वर्धयन् ।।साम 3.5.8।। सन्धिछेदः-मनीषिभिः पवते पूव्र्यः कविर् नृभिः यतः परि कोशान्
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शास्त्र विधि विरुद्ध साधना पतन का कारण – पवित्र गीता जी

पवित्र गीता अध्याय 9 के श्लोक 23, 24 में कहा है कि जो व्यक्ति अन्य देवताओं को पूजते हैं वे भी मेरी (काल जाल में रहने वाली) पूजा ही कर रहे हैं। परंतु उनकी यह पूजा अविधिपूर्वक है(अर्थात् शास्त्रविरूद्ध है भावार्थ है कि अन्य देवताओं को नहीं पूजना चाहिए)। क्योंकि सम्पूर्ण यज्ञों का भोक्ता व
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ब्रह्म का साधक ब्रह्म को तथा पूर्णब्रह्म का साधक पूर्णब्रह्म को ही प्राप्त होता है:- पवित्र गीता जी

ब्रह्म का साधक ब्रह्म को तथा पूर्णब्रह्म का साधक पूर्णब्रह्म को ही प्राप्त होता है गीता अध्याय 8 श्लोक 5 से 10 व 13 तथा गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में निर्णायक ज्ञान है। गीता अध्याय 8 श्लोक 13 में कहा है कि मुझ ब्रह्म की साधना का तो केवल एक ओ३म् (ॐ) अक्षर है
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श्री भागवत गीता का ज्ञान किसने बोला जानिये सत्य क्या हैं ?

पवित्र गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नही दिया काल ने दिया था। पवित्र गीता जी के ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध होने जा रहा था।अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया था। युद्ध क्यों हो रहा था? इस युद्ध को धर्मयुद्ध की संज्ञा भी नहीं दी
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पवित्र भागवत गीता जी का सार सन्देश

श्रीमद्भगवद्गीता जी का अनमोल यथार्थ पुर्ण ब्रम्ह ज्ञान (गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित)  मैं सबको जानता हूँ, मुझे कोई नहीं जानता (अध्याय 7 मंत्र 26)  मै निराकार रहता हूँ (अध्याय 9 मंत्र 4 )  मैं अदृश्य/निराकार रहता हूँ (अध्याय 6 मंत्र 30) निराकार क्यो रहता है इसकी वजह नहीं बताया सिर्फ अनुत्तम/घटिया भाव काहा है,
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