पवित्र गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नही दिया काल ने दिया था। पवित्र गीता जी के ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध होने जा रहा था।अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया था। युद्ध क्यों हो रहा था? इस युद्ध को धर्मयुद्ध की संज्ञा भी नहीं दी

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श्रीमद्भगवद्गीता जी का अनमोल यथार्थ पुर्ण ब्रम्ह ज्ञान (गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित)  मैं सबको जानता हूँ, मुझे कोई नहीं जानता (अध्याय 7 मंत्र 26)  मै निराकार रहता हूँ (अध्याय 9 मंत्र 4 )  मैं अदृश्य/निराकार रहता हूँ (अध्याय 6 मंत्र 30) निराकार क्यो रहता है इसकी वजह नहीं बताया सिर्फ अनुत्तम/घटिया भाव काहा है,

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ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्राम् अत्येति रेभन्।।17।। अनुवाद – पूर्ण परमात्मा (हर्य शिशुम्)मनुष्य के बच्चे के रूप में (जज्ञानम्)जान बूझ कर प्रकट होता है तथा अपने तत्वज्ञान को (तम्)उस समय (मृजन्ति) निर्मलता के साथ (शुम्भन्ति)उच्चारण करता है। (वह्नि)प्रभु प्राप्ति

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