पवित्र तीर्थ तथा धाम की जानकारी किसी :- किसी साधक ऋषि जी ने किसी स्थान या जलाशय पर बैठ कर साधना की या अपनी आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन किया। वह अपनी भक्ति कमाई करके साथ ले गया तथा अपने ईष्ट लोक को प्राप्त हुआ। उस साधना स्थल का बाद में तीर्थ या धाम नाम पड़ा। अब

Read More »

कबीर साहेब द्वारा विभीषण तथा मंदोदरी को शरण में लेना :- ??? परमेश्वर मुनिन्द्र अनल अर्थात् नल तथा अनील अर्थात् नील को शरण में लेने के उपरान्त श्री लंका में गए। वहाँ पर एक परम भक्त चन्द्रविजय जी का सोलह सदस्यों का पुण्य परिवार रहता था। वह भाट जाति में उत्पन्न पुण्यकर्मी प्राणी थे। परमेश्वर मुनिन्द्र

Read More »

पवित्र गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नही दिया काल ने दिया था। पवित्र गीता जी के ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध होने जा रहा था।अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया था। युद्ध क्यों हो रहा था? इस युद्ध को धर्मयुद्ध की संज्ञा भी नहीं दी

Read More »

कबीर परमेश्वर की अमृतवाणी कबीर, जिन हरि की चोरी करी, गये राम गुण भूल । ते विधना बागुल किये, रहे उर्धमूख झूल ।। कबीर परमेश्वर जी कहते है कि:- जो लोग मनुष्य जन्म पाकर सत् भक्ति नही करते वे बार बार गर्भवाश में आकर उलटे लटकते है तथा ऐसे जीवों के रुप में जन्म लेते

Read More »

संत कबीर के दोहे, हिन्दू और मुस्लमान के धार्मिक विचारो पर व्याख्यान जो तूं ब्रह्मण , ब्राह्मणी का जाया ! आन बाट काहे नहीं आया !! – कबीर (अर्थ- अपने आप को ब्राह्मण होने पर गर्व करने वाले ज़रा यह तो बताओ की जो तुम अपने आप की महान कहते तो फिर तुम किसी अन्य

Read More »

कबीर, दर्शन साधु का, करत न कीजै कानि | ज्यो उद्धम से लक्ष्मी, आलस मन से हानि।। कबीर, सोई दिन भला, जा दिन साधु मिलाय। अंक भरे भरि भेटिये, पाप शरीरा जाय।। मात-पिता सुत स्त्री, आलस बन्धु कानि। साधु दर्श को जब चलै, ये अटकावै आनि।। साधु भूखा भाव का, धन का भूखा नाहि। धन

Read More »