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मैं मौन हु इसलिए नहीं कि, में सेलफिश हु़ं में मौन हुं इसलिए कि, में जानना चाहती हुं कि में कौन हुं... मैं मौन हु इसलिए न� read more >>
मृत्यु जीवन का एक कड़वा सच है। जिसे हम झुठला नहीं सकते है। एक दिन सभी को इसी रस्ते जाना है। तो क्यों डर रहे है। असल हमें मृत्यु से डर नही� read more >>
युद्ध कैसा भी रहा हो इसका खामियाज हमेशा आम जनता ही भुगती है एक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण बचाने कि बात होती है। और दूसरी और युद� read more >>
में कहना चाहती हुँ हम कितना अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है। और क्या सरकार भी जागरूक है। मुझे माफ करना में हमें अपने लेख में गरीबी ,बेर� read more >>
13 अप्रैल 1919 आजही के दिन जलियाँवाला बाग हत्या कांड को अंजाम दिया गया यह घटना स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाली घटनाओं म� read more >>
रंग-बिरंग- गुजरते अनेक नयन में भेदभाव ना जाने सब- जन-जीव सम उपनयन में पांच बरन- की चुनरी में सजके बना, हर मंदिर जिसमें रहते राम -मोती read more >>
नाम ले के मर जाए या पीके मर जाए तुझे क्या इश्क़ करू या न करू या भरपुर करू तुझे क्या तू सपने में आती हैं मेरी मगर मैं न आ ऊ तुझे क्या च� read more >>
तू इधर इधर के बात न कर ये बता तेरा इरादा क्या हैं ! तू हर बार दोसी बताता हैं मुझे लेकिन ये तो बता तेरा सच क्या हैं !! शहर के शहर हैं जल रह� read more >>
क्या करे तुझ से इश्क़ हैं तो हैं क्या करे तू बात बात में रूठती हैं अब रूठती हैं तो रूठती हैं क्या करे जी करता हैं तुझे मना लू अपने आख� read more >>
सुनो प्रिय सारी दुनिया हमसे रूठे पर तुम कभी नहीं रुठ ना लाखों के भीड़ में मैंने चुना है सिर्फ तुम्हे तुम भी हमें लाखों में ही चुनना read more >>
# लोकतंत्र ...... सफेदपोश गिद्ध आयेंगे रचकर भयानक षड्यंत्र ... लोकतंत्र को कमजोर बनाने मजबूत बनाने राजतंत्र ... संसद से निकाल ले जाएंगे read more >>
शहरों का ये , घनाँ काला घुआँ , ओर ज़िन्दगी की ऊमीद में, चलते लोग । कई, बेहतर भविष्य । तो, कहीं हारते लोग बढ़ती आबादी का हे। ये.... कोहर� read more >>
नयन, ज्योति जुगनू सम- उमर गए गुजर जात उपनयन, अंदर जीवन ज्योति- अमर तत्व में मिल जाता -मोती शब्दार्थ :- नयन = भौतिक नेत्र। उपनयन = आंतरि� read more >>
14 अप्रैल1891 -6 दिसंबर1956 🙏🙏🌺🌺 डॉ . भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश के महू में हुआ था यह भारतीय विविवेता, अर्थशास� read more >>
हम लोग नारि शक्ति के विषय पर बहुत बात करते हैं और यह केवल एक विषय बनकर रह गया है .इसे अपने जीवन में बहुत कम लोग ही उतार पाते हैं। नारि का � read more >>
बनकर साया संग रहती है, सब कष्ट हमारे सहती है, बन तरुवर निर्मल ममता का, छाया प्रमोद की देती है, सर्वस्व अपना न्योछावर कर, वह ज्ञान प्रेम � read more >>
मैं उस देश का बेटा हूं..... मैं उस देश का बेटा हूं जहां गंगा यमुना बहती है, मैं उस देश का बेटा हूं जहां सम्मान सिखाई जाती है । मैं उस देश क� read more >>
कुछ नहीं मैं बस एक सोच के गम में डूबा हुआ हूं। अब क्या करूं मैं तो खुद से ही खुद को समझा रहा हूं। बस लगता हैं उन लोगों को की मैं उनसे दू� read more >>
जो हम छूट गए राह में क्या मिलेगे कभी अगर मिल भी गए तो क्या एक बनेगे कभी मिलना जरूर कुछ लम्हे बिताएंगे साथ साथ कुछ नगमे गुन गुनायें� read more >>
क्यों आँखें नम करती हैं बातें कम करती हैं अगर कहने से डरतो हैं तो हिमत जुटा और लिख आसुओ को बहने मत दे होठों को सिसकने से रोक जज्बात� read more >>
मेरी बातों का अफशान बन जाएं तो अच्छा हैं जज्बातों में पंख लग जाएं तो अच्छा हैं होठ खामोश मगर नैन उड़ जाएं तो अच्छा हैं साँस थम जाए� read more >>
उसे पालु,और क्या शिकायत होगी ख्वाब को देख रूबरू, सुकू की चाहत होगी मन की मुराद जब, हकीकत में मिलेगी खुसियो कि चुनर ये , दिल ओढ़ लेगी छाए read more >>
Tujhe lakh koi our pasand aa jaye . Par mujhe tere siva koi our pasand nhi aata. Mai bhi sochati hu teri tarah move on kar jau. Par kambakht tera chehra meri nazro se nhi jata read more >>
देखा था एक लाचार मां को मन्दिर के बाहर लेती पड़ी थी। चार चार बेटे होते हुए भी ,वो भूख से रो पड़ी थी । उसने अपने बेटो को कैसे पाला, ये कहान� read more >>
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