कविता ( गिला )
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!
फ़क़ीरी में, मैं हूँ पला !
फ़क़ीरी का भी हो भला !!
फ़क़ीरी से ही सीखा हूँ !
जीने की हर कला read more >>
हमारे ह्रदय की कोमल हवेली को हथौड़ों से गिरा के ओ गया है,
मोहब्बत करना गुनाह था,ये बता के ओ गया है,
अरे ओ तो शौकीन व्यापारी था मोहब्बत ए � read more >>
हम कौन थे.....
कहां पर रहे हैं कहा जा रहे हम।
पश्चात सभ्यता में पलते जा रहे हम।।
यहीं के जगत गुरु थे सारे जहां के ।
वेदों की ज्ञान गंगा बह read more >>
मुहोब्बत का एक अलग ही सुरूर है, मिया
जिसे मिल जाय बो मगरूर है।
जिसे छोड़ दे वो गम में चूर है।
नये आशिको के लिए इस में नूर है।
जो हर एक से म� read more >>