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पहले जो था खुमार ओ खुमार आती नहीं है।
पहले जो था खुमार ओ खुमार आती नहीं है। बूढ़े दरख्त पर फिर से बहार आती नहीं है। पहले बुलबुले चहचाहती थी जिस साख पर। उस साख पर फिर
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ना मूझे दौलत पियारी,
ना मूझे दौलत पियारी, ना सौरत पियारीहै। बेरोजगार हू, साहब मुझे नौकरी पियारी।
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बेरोजगार-बेरोजगार हू, साहब
ना मूझे दौलत पयारी ना सौरत पयरी है। बेरोजगार हू, साहब मुझे नौकरी पयारी है।
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MUSKAN
JALE KO RAKH KHTE HAI... BUJHE KO KHAK... KHTE HAI😂 JO DELHI KO HILANE KI TAKAT RAKHE...... USSE NITISH KUMAR KHTE HAI
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शाश्वत वचन....
शाश्वत वचन! अपने अंतरतम की- आवाज को जब मनुष्य, सुनने के काबिल बनता है तब जीवन का- असली नृत्य शुरू होता है शाश्वत वचन! -मोती
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तुम्हें अपने खातिर....
विलक्षण- जीव जगत में तु श्रेष्ठ, एक कुव्वत के खातिर रूबरू- हो जा इस जीवन से क्योंकि- रब ने चुना है, तुम्हें अपने खातिर -मोती
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समाधान हर बात का
समाधान हर बात का,होता नहीं निराश। सुख दुख तो आते रहे, मन में दिव्य प्रकाश।। समाधान हर बात का,बनूं नहीं मैं दुष्ट। रखूं सदा मैं मित्रत�
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दुनियाँ का दस्तुर है
दुनियाँ का दस्तूर है, जीवन है संघर्ष। पाते मीठा स्वाद को, सत्य अटल निष्कर्ष।। दुनियाँ का दस्तूर है,चलूं सदा सच राह। पुष्ट विजय तब है �
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माया के भ्रम जाल
माया के भ्रम जाल का,ढूंढें सभी निदान। जाते पर सब ही उलझ,छूटे नहीं गुमान।। माया के भ्रम जाल से, बचें सदा इन्सान। साथी बन अनुराग का,उनका
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मेंढक हैं बरसात के
मेंढक हैं बरसात के, इनकी अभी बहार। करते मिलकर ये मजे, कुछ दिन में बेजार।। मेंढक हैं बरसात के, समझ रहें हैं शेर। सवा शेर से जब मिले, हो ज�
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मेंढक हैं बरसात के
मेंढक हैं बरसात के, इनकी अभी बहार। करते मिलकर ये मजे, कुछ दिन में बेजार।। मेंढक हैं बरसात के, समझ रहें हैं शेर। सवा शेर से जब मिले, हो ज�
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साथी बन अनुराग का
माया के भ्रम जाल का,ढूंढें सभी निदान। जाते पर सब ही उलझ,छूटे नहीं गुमान।। माया के भ्रम जाल से, बचें सदा इन्सान। साथी बन अनुराग का,उनका
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चले स्कूल शिशु सभी
चले स्कूल शिशु सभी,पानी मय है राह। बैग स्कूल का लिए,चंचल सबका चाह।। सब कागज के नाव को,लिए हुए हैं हाथ। तैराने में हैं लगे, सभी दोस्ते�
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खुशियां मय संसार था
चले स्कूल शिशु सभी,पानी मय है राह। बैग स्कूल का लिए,चंचल सबका चाह।। सब कागज के नाव को,लिए हुए हैं हाथ। तैराने में हैं लगे, सभी दोस्ते�
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छाया सबको चाहिए
छाया सबको चाहिए, क्योंकि सभी में कष्ट। ऐसे में छाया मिले, होता विकार नष्ट।। छाया सबको चाहिए,तन्हा सब हैं आज। साथी बनकर साथ चल,सुन्दर �
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स्पर्धा का दौर है
स्पर्धा का दौर है,मन को रखें बुलंद। रखिए ऊँच विचार को, हों शीतल सम चंद।। स्पर्धा का दौर है, रखें साथ उत्साह। कम हों कभी न चाह नव,लगे सु�
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सुख दिख हैं मेहमान जी
सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भी प्रभु मै
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जलने लगे अलाव अब
जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों ओर। थड़थड़ हैं तन कांपते, बंधे नहीं है कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नहीं,गाते सब
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इच्छाएं बेअंत है
इच्छाएं बेअंत है,काबू में रख यार। बेहिसाब रख प्यार को, सुख मय हो परिवार।। इच्छाएं बेअंत है, परम् जरूरी आप। मैं चाहूं जग का भला, करूं मं
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वक्त है बदलाव का
मंदी क्यों है व्यापार में ? बर्तन का व्यापारी परिवार के लिये जूते ऑनलाइन खरीद रहा है... जूते का व्यापारी परिवार के लिये मोबाइल ऑनलाइन ख�
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बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था...दगाबाज
दगाबाज बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था... उसके पास एक बडी जालीदार टोकरी में बहुत सारे तीतर थे..! और एक छोटी जालीदार टोकरी में सिर्�
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हवस का भूखा इंसान
एक सामान्य स्वप्न ले कर जीने वाली लड़की। एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी जिसने अभी जीना शुरू भी नहीं किया था कि जला कर मार दी गयी। क्यों
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मंदबुद्धि का बालक।
मैं मंदबुद्धि का बालक घर से लेकर स्कूल तक बुद्धिमान लोगों से खाता हूं बुद्धि का चोट, मै स्कूल के सबसे पीछे सीट पर बैठ टीचर के शब्दों को �
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भारत एक बड़ा बाजार है
उदारीकरण भूमंडलीकरण का आर्थिक तत्व है। यह एक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत एक अत्यंत नियंत्रित अर्थव्यवस्था खुली दिखने वाली व्यवस्था
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