तूं बरसात की बूंद बन मेरी चाहत आई हो,
मेरे लिए बस और बस खुशियाँ लाई हो।
राह मैं तेरी देख रहा था कब से,
तेरे आने के लिए पुकार रहा था कब से।
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नारी सृजन का आधार है,
नारी से ही जीवन साकार है,
नारी समर्पण की अद्भुत मूर्त है,
हर रूप में कर्तव्य स्वरूप है,
मां, बेटी, बहू,भाभी, बहन हर र� read more >>