एक प्राथमिक स्कूल मे अनीशा नाम की एक शिक्षिका थीं वह कक्षा पांच की क्लास टीचर थी, उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा मे आते ही हमेशा "लव यु आल" बोल� read more >>
एक रिश्ता बेनाम सा.. ना हासिल ना जुदा ... ना खोया ना पाया.. फिर भी करीब- सा ..मोहब्बत तो नहीं पर मोहब्बत सा.. जरूरत तो नहीं पर जरूरी सा.. जाने क्य read more >>
कभी खुद से भी मिला करो
कभी अपने से भी बात किया करो! सबसे ना मुख मोड़ा! करो! हर पल सच की भी खबर रखा करो
यह तो सच है कि सच कहने वालों को भी सहन� read more >>
क्या लिखूं !मन मौन है !पर लिखने को भी मन बेचैन है!
उलझन है मेरी उसको मैं !
ना सुलझा सकी !
राह के एक पत्थर को भी मैं
ना हिला सकी दर्द से कराह� read more >>
कोई चाहत नहीं है मुझ में !
कोई उम्मीद भी नहीं है मुझ में! शायद !इसीलिए जिंदगी मेरी वीरान है !
कोई आस भी नहीं है! जितना मिल जाए वह भी बहुत है ! read more >>
रूठते थे हम भी कभी बच्चों की तरह !
अपनी चोटी को ठीक से बनाने की जिद करते थे हम भी कभी।
हंसते थे कभी खिलखिला कर। राह पर यूं ही ।
रहते थे मस� read more >>
ऐ मन तु अपनी मर्जी क्यों चलाता रहा !
तू चाहता क्या है?
यह कभी तो मुझे भी बता ।
जब भी सोचता हूं !
मैं कुछ तुम मुझे और ही किसी राह पर ले जाता र read more >>
बहुत कोशिश है कि तुम्हें भूलने की
न
जाने क्यों ?तुम दिल से निकलते नहीं हो !कई बार ऐसा महसूस होने लगा है !
तुम ही शब्द !
बनकर आते हो जुबां !
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