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(दोहा छंद) पैसा जरुरी आज है, बिना नहीं हो काम। करें मेहनत खूब जब, होता है तब नाम।। पैसा जब हो पास में, पूछे सब जन यार। साथ देय तब आपका, खुश� read more >>
एक दिन आशमा पे छाउँगा जरूर बनके तूफान लौटूंगा जरूर मिटा दूंगा मगरूर घमंड का घमंड फानूस बनके कहर ढाउंगा जरूर हमने तो जलना ही सीखा है read more >>
अगर इश्क़ था तो जताया क्यों नहीं अरे पगली कही के बताया क्यों नहीं मैं चाहता हु तू मेरे पास हो मेरे खाबो में ही नहीं हकीकत में भी तू � read more >>
काश तुम तक पहुंच पता मेरी सिसकती आबाज न तन्हां मैं होता न सिकायत होती तुम्हे आज तेरा एक तस्वीर चाहिए थोड़ा सा आँखों का नीर चाहिए जो read more >>
बहुत अरसे पहले की बात यह है, देख विषय यात्रा वृतांत का याद आया। शौख की प्रकाष्ठा पर चढ़कर, मैं गुजरात के पोरबंदर में गया था। मेरे जीव� read more >>
(दोहा छंद) करें मेहनत दिल लगा, सपना हो साकार। कदम चुमें तब सफलता,जीवन हो गुलजार।। सपना हो साकार तब, सतत लगन से काम। करें कर्म को हृदय से read more >>
आकांक्षाओं के सागर में मन तैरते हैं, एक नहीं हजारों तृष्णा में हम जीते हैं, मेरे हिसाब से तृष्णा पालना भी चाहिए_ पूर्ण करने हेतु हर कोश read more >>
कलम कलम में कविता का अंश दिखाई पड़ता है। अधर अधर से कविता का नवकुंज् सदा ही झड़ता है।। काव्यबद्ध हो जीवन तो, यूँ भाव सरल हो जाते हैं। read more >>
कलम कलम में कविता का अंश दिखाई पड़ता है। अधर अधर से कविता का नवकुंज् सदा ही झड़ता है।। काव्यबद्ध हो जीवन तो, यूँ भाव सरल हो जाते हैं। read more >>
हम सभी हीरो बने फिरते हैं, अपनी जुबानी में, । याद रखिये हर कोई विलन है, किसी न किसी की कहानी में।। रचनाकार- समर सिंह " समीर G " read more >>
मैंने अपने बच्‍चों को कभी नहीं बताया कि मैं क्‍या काम करता था । मैं उन्‍हें कभी मेरी वजह से शर्मिंदा महसूस नहीं कराना चाहता था । जब मेर� read more >>
(रोला छंद) लब पर हो नव गीत,हृदय में उमंग रखिए। जीवन में संगीत, आप नित पथ पर चलिए।। चलना ही है जान, आयु हो तब ही ज्यादा। करें पूर्ण सब काम,क read more >>
(दोहा छंद) पुत्र पुत्र में मत करें, आप कभी भी भेद। सबको करें दुलार सम, नहीं नियत में छेद।। दामन थामें न्याय की,देंगें दुनिया साथ। खुशि� read more >>
(दोहा छंद) रुग्ण लोग से दूर रह, मन में भर उत्साह। सदा गात पर ध्यान रख, आते कभी न आह।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(� read more >>
(दोहा छंद) भारत देश महान हैं, रखें शांति की भेष। जगत रूप आदर्श हैं, यहां सतत उन्मेष।। धरती पावन सुनहरी, भारत देश महान। ज्ञान वान सब लोग read more >>
कुछ फूल कागज के भी बहुत खुशबूदार बनाए जा सकते हैं, इनमें भी रंग हजार भरे जा सकते हैं। मायावी दुनिया में चाल_ढाल लोगों के बदलते रहते हैं, read more >>
जीवन का मूल आधार तो परिवार ही है दुनिया का दर्शन तो परिवार ही दिलाते हैं। परिवार से ही समाज हैं, समाज से ही देश हैं। ज्ञान की प्रथम प� read more >>
(दोहा छंद) सुन्दर दोहा नित लिखें, रखिए लय पर ध्यान। गाने में तब प्रिय लगे, बने अनमोल गान।। लय के सम ही ताल हों, रखें मधुर आवाज। श्रोता स� read more >>
(दोहा छंद) लोग लोग से क्षुब्ध हैं,मिलता नहीं उपाय। गजब समय का फेर है, सभी हुए असहाय।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीप� read more >>
(दोहा छंद) दिन दिन बढ़ती जा रही, दुनिया में तकलीफ। तरह तरह के रोग से, मिले नहीं तारीफ।। दिन दिन बढ़ती जा रही,सब चीजों की मूल्य। आफत यह ह� read more >>
दोस्त का होना जीवन में नितांत आवश्यक है, जो जीवन सुरभित कर खुशी का खजाना हैं । सु:ख_दु:ख के चक्र में दोस्त अमृत तुल्य हैं, जिससे जिन्दगी read more >>
(दोहा छंद) महफ़िल में वह भी मिली, सुर्ख़ चेहरा ख़ास। नज़र जिगर सूरत बसी,मिटी युगों की प्यास।। खान बात सब अति चली,जुड़ा ह्रदय की तार। स� read more >>
(मुक्तक छंद) हमें मुहब्बत हो गया, तुझ से ही ओ यार। यादों में तुम ही रहें, मेरे दिल हकदार। तुझ में ही है जिन्दगी, तुझ में ही दिल जान_ सबकुछ read more >>
(दोहा छंद) यूं ही हृदय उदास है, दिल में है जो दर्द। किसे कहूं अब यार मैं, मौसम भी है सर्द।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्� read more >>
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