पढ़ाकर तो देखो Gazal By Rahul Red

पढ़ाकर तो देखो Gazal By Rahul Red

भँवर में सही कश्ती को मुड़ाकर तो देखो बारिश में पैर जमीं पे गड़ाकर तो देखो कुछ भी है मुमकिन अगर ठान लें हम सब हाँथ समानता की ओर बढ़ाकर तो देखो भेदभाव ख़त्म कर अब अपनी बेटी को शिक्षा के शिखर पर चढ़ाकर तो देखो हुनर है इनमे दुनियाँ को बदलने का बेटियों को
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मुझे रोजगार चाहिए by राहुल रेड

खाली कन्धे हैं इन पर कुछ भार चाहिए बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए जेब में पैसा नही डिग्री लिए फिरता हूँ दिनो दिन अपनी ही नजरो में गिरता हूँ कामयाबी के घर में खुले किवाड़ चाहिए बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए। दिन रात एक करके मेहनत बहुत करता हूँ सूखी रोटी खाकर ही
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