नाच रहा है मोर हो गया है भोर, वर्षा हुई घनघोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| बयार चल रही चारों ओर, तृप्त हुआ अवनी का एक-एक छोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| उर में हर्ष नहीं है थोर, दादुर मचा रहे हैं शोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा

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शिक्षा बड़ी उदार घर-घर में जिसे मिला मान, करती सबका है कल्याण; जिसके बल पर चले घर-बार, शिक्षा बड़ी उदार। गांधी,नेहरू और कलाम, इसकी बदौलत बने महान; दूर करे अज्ञानी अंधकार, शिक्षा बड़ी उदार। दीन को दिलाती यह पहचान, इसके आगे रंक-न-राजा; सभी को देती मान समान, तलवार से अधिक है इसमें धार, शिक्षा बड़ी

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