पवित्र तीर्थ तथा धाम की जानकारी किसी :- किसी साधक ऋषि जी ने किसी स्थान या जलाशय पर बैठ कर साधना की या अपनी आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन किया। वह अपनी भक्ति कमाई करके साथ ले गया तथा अपने ईष्ट लोक को प्राप्त हुआ। उस साधना स्थल का बाद में तीर्थ या धाम नाम पड़ा। अब

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ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्राम् अत्येति रेभन्।।17।। अनुवाद – पूर्ण परमात्मा (हर्य शिशुम्)मनुष्य के बच्चे के रूप में (जज्ञानम्)जान बूझ कर प्रकट होता है तथा अपने तत्वज्ञान को (तम्)उस समय (मृजन्ति) निर्मलता के साथ (शुम्भन्ति)उच्चारण करता है। (वह्नि)प्रभु प्राप्ति

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