कबीर साहेब द्वारा विभीषण तथा मंदोदरी को शरण में लेना :- ??? परमेश्वर मुनिन्द्र अनल अर्थात् नल तथा अनील अर्थात् नील को शरण में लेने के उपरान्त श्री लंका में गए। वहाँ पर एक परम भक्त चन्द्रविजय जी का सोलह सदस्यों का पुण्य परिवार रहता था। वह भाट जाति में उत्पन्न पुण्यकर्मी प्राणी थे। परमेश्वर मुनिन्द्र

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साहेब कबीर आजा आत्मा तोहे पुकारती । तेरे हाथ मेँ चाबी सतगुरु, सतलोक द्वार की ।।(1) 22 लाख वर्ष तप किना, इक तपस्वी कर्ण कहाया , तप से राज राज मद मानम , नर्क ठिकाणा पाया । सिर धुन धुन के पछताया , या थी बाजी हार की ।।( 2 ) साहेब कबीर आजा ,

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