लेकिन क्यों – मनमोहन कसाना

लेकिन क्यों – मनमोहन कसाना

मैं तब लगभग सात साल का था। एक मासूम बालक जो सिर्फ स्कूल से आकर मां की गोद में दुबक कर बैठता और फिर मास्टर का दिया काम करके खेलता और थक कर सो जाता। लेकिन तब मेरे पर इल्जाम था ‘‘गौ हत्या’’ का। ये इल्जाम ही नहीं रहा बल्कि इसे धेाने के लिए मुझे
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दस्तक

   दस्तक कुछ खास नहीं बदले हम , आपके जाने के बाद भी बस फर्क इतना सा है , कभी – कभी तेरी याद दस्तक दे जाती है जालिम बिलकुल तेरी तरहा |  मनमोहन गुर्जर 0

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