नाच रहा है मोर हो गया है भोर, वर्षा हुई घनघोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| बयार चल रही चारों ओर, तृप्त हुआ अवनी का एक-एक छोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| उर में हर्ष नहीं है थोर, दादुर मचा रहे हैं शोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा

Read More »

कलाम को मेरा सलाम हुआ था एक बुद्धि-सम्राट, कथा है जिसकी बहुत विराट; कभी न भाया जिसे आराम, उस कलाम को मेरा सलाम। हिंद को किया परमाणु प्रदान, वह था धरणी माँ का वरदान; जिसने किए खोज तमाम, उस कलाम को मेरा सलाम। जो `मिसाइल मॅन´ कहलाया, शास्त्र जगत में इतिहास बनाया; जिसको प्यारी सारी

Read More »

है मेरी अभिलाषा छू लूँ गगन बिना लिए पर, किसी का न हो मुझको डर; मंजिल छोडू न भी मरकर, है मेरी अभिलाषा। सामर्थ्य रहे मुझमें इतना, करूँ मैं सभी का उद्धार; बनूँ मैं दीन का जीवनाधार, कुछ न लगे मुझे अपार; है मेरी अभिलाषा। यदि कहीं हो भ्रष्टाचार, कर दूँ उसे मैं तार-तार; न

Read More »

शिक्षा बड़ी उदार घर-घर में जिसे मिला मान, करती सबका है कल्याण; जिसके बल पर चले घर-बार, शिक्षा बड़ी उदार। गांधी,नेहरू और कलाम, इसकी बदौलत बने महान; दूर करे अज्ञानी अंधकार, शिक्षा बड़ी उदार। दीन को दिलाती यह पहचान, इसके आगे रंक-न-राजा; सभी को देती मान समान, तलवार से अधिक है इसमें धार, शिक्षा बड़ी

Read More »

रक्षाबंधन बहन-भाई की प्रीति है, यह चली आ रही रीति है; है अनुरागा यों सलोना बंधन, लो पधारा पर्व ‘रक्षाबंधन’। त्योहार यह ठहरा प्रतीक-ए-अमन, पवित्र ‘श्रावण’ माह होता आगमन; सर्वत्र परस्पर तिलक-चंदन, जिसे दर्शाए ‘रक्षाबंधन’। डोर यों तो कच्चे धागे का, सुरक्षा-चिह्न आयुष्यभर का; विनोदमय हुए सभी के मन, आया खुशनुमा ‘रक्षाबंधन’। इस रिश्ते का

Read More »