तुम बीन नही कुछ भी मेरा, मेरी दिन मेरी रात तुम। मेरी जिंदगी की हर आश तुम। जाने ना दूंगी दूर कही, तुम बिन मैं मर जाऊँगी। बादा है तुमसे ये मेरा, मैं दूर कभी ना जाऊँगी। तेरी हर खुशियो के लिए, मैं हद से भी गुजर जाऊँगी। मैं शाम तुम सबेरा मेरा, मैं निर

Read More »

आंगन खेलने की उम्र, ना जाने कब गबाइ। बेटियां क़्यो होती है, दुखों की परछाई।। हर गम, हर तकलीफ, झेलती है बेटियां ही। हर कुर्बानी, हर त्याग, देती है बेटियां ही।। अपने परिबरो के लिए, मर मिटती है बेटियां ही। हर कदम पर साथ, देती है बेटियां ही।। ना जाने फिर भी क़्यू, पराई होती

Read More »

मानव का है भीड़ जहाँ, रहते जहा पांछियो का बास्। पेड़ पौधे जिस धरा पर रहते, लालिमा बिखेरती जहाँ आसमान। अपने जीवन का निर्माण, जो करता यही है हमारा संसार। स्वर्ण बर्ण से दिन लिख जाता, जब अपने जीवन का हार। हँस देता जब प्राण सुनहरे, आंखों मे लिए सपनो की धार। छलकी पलको से

Read More »

मिट्ठी की गुड़ियों से खेलकर, कब इतनी सयानी हुई। तेरी ममता की अंचल मे, जाने कब मैं बड़ी हुई। बचपन की वो प्यारी यादे, आज भी सब कुछ ताजा है माँ। तुम ही रहती दिल के घर मे, प्यार ये तेरा कैसा,माँ दुनिया की तपिश मे शीतल छाया देती,माँ जब भी मैं उदास रहु। बस

Read More »

माँ तुम मेरी आशा,और अभिलाशा ममता से भरी अपनो की परिभासा। तुम साथ मेरे हरदम, बनकर एक साया, तुमने ही मेरा जीवन महकाया। हर सुखों मे माँ, तुमने हौशला बढ़ाया, दुखो की दहलिजो पर चढ़ना सिखाया। माँ तुम जन्नत की फूल है, तेरे ही कदमो मे माँ जन्नत की धूल है। तुम त्याग हो,तपस्या हो

Read More »