तुझमें समा जाऊं- शुभम् लांबा

तुझमें समा जाऊं- शुभम् लांबा

जब तुम हो पास मेरे, मैं क्यूं न हद से गुजर जाऊँ। जिस्म बना लूँ मैं तुम्हें, या‌‌ रूह मैं तुम्हारी बन जाऊँ। तु कहे अगर इक बार मुझे, मैं खुद ही तुझमें समा जाऊँ। लबों से छूँ लूँ जिस्म तुम्हारा, सांसों में सांसें जगा जाऊँ। अपनी जिंदगी बना लूँ मैं तुम्हें, और मरने की
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आरज़ू – शुभम् लांबा

सच कहूं तो, तेरे जिस्म पर लिबाज़ अच्छा लगता है, पर तेरी रूह पर नहीं, तेरे हुस्न पर पर्दा अच्छा लगता है, पर तेरे दिल पर नहीं। तेरे लबों पर सिर्फ मेरा नाम अच्छा लगता है, पर किसी और का नहीं। तेरे इश्क का इजहार अच्छा लगता है, पर तेरी जुदाई का ख्याल नहीं। तेरे
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दिल्लगी ❤- शुभम् लांबा

अजीब सी है ये दिल्लगी ❤️। मुझे तुमसे दूर जाना अच्छा नहीं लगता। तुम्हें मेरे करीब आना अच्छा नहीं लगता। और लोगों को ये इश्क सच्चा नहीं लगता। तो फिर दिल ❤️ मेरी सुन ना,🙏 मत बैचेन हो उसके लिए इतना। सच कहूं तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई तो होगा जो उसको समझाएगा,
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ये रिश्ता क्या कहलाता है? – शुभम लाम्बा

अजीब सा रिश्ता है ये। तुम्हें मुझसे बातें करके अच्छा लगता है, मुझे तुम्हारी बातें सुनकर अच्छा लगता है। तुम्हें मुझसे झगड़ना अच्छा लगता है, मुझे तुम्हें मनाना अच्छा लगता है। तुम्हें मुझसे रुठना अच्छा लगता है, मुझे तुम्हें डांटना अच्छा लगता है। फिर ये रिश्ता क्या कहलाता है? पर जैसा भी है, बड़ा अनमोल
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तुम बड़ी अजीब हो माँ – शुभम् लांबा

माँ…. तुमने जन्म दिया मुझे और मेरी रूह को एक नाम दिया। अपनी जिंदगी का सब कुछ मेरे नाम किया। इतनी पीड़ा सही मेरे लिए और मुझे कभी दर्द का एहसास तक नहीं होने दिया। सिर्फ व्रत रखा मेरे लिए और मुझे कभी भुख का एहसास तक नहीं होने दिया। इतनी परवाह रखी मेरे लिए
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मेरी याद आएगी तुम्हें – शुभम् लांबा

मेरी याद आएगी तुम्हें, जब दूर चला जाऊंगा,😢 दूर इतना की लौट कर कभी ना आऊंगा।😒 अब तक सिर्फ तुम्हारे दिल में रहता था,❤ फिर तुम्हारी याद में बस जाऊंगा😏? याद आएगीं तुम्हें मेरी बातें और मुलाकातें,😍 मगर ‌तब तुमसे कभी मिल ना पाऊंगा।😔 तड़फोगी मेरे बारे में सोच-सोच कर,😳 मगर तब मैं नज़र ना
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प्रदूषण एक समस्या – शुभम लाम्बा

मेरे हिसाब से इस देश में, अब #वायु प्रदुषण से ज्यादा #मानसिक प्रदुषण पर चिंता करने की जरूरत है। शुभम लाम्बा

इंसानियत की रक्षा – शुभम लाम्बा

#जय गौ माता।🙏 ना #भगवा धारण करूं, ना ही #काला और #सफेद पहनना चाहूँ सूँ। चाहे #इंसान हो या #जानवर , बस #इंसानियत निभाना चाहूँ सूँ। शुभम लाम्बा

एक ख्वाइश – शुभम लाम्बा

घुटन सी होने लगी है, इश्क़ जताते-जताते, मैं खुद से रूठ गया हूँ, तुम्हे मनाते-मनाते! समझ सकते हो तो समझिए, मेरे इश्क का और इन्तहा मत लिजिए।🙏 शुभम लाम्बा

एक लंबा सफर – शुभम् लांबा

बेखबर, एक सफर में चला जा रहा था में, तेरी यादों का कारवां साथ लिए चला जा रहा था में। कुछ सुझ नहीं रहा था ,सिर्फ महसूस हो रही थी तेरी कमी, शायद इसलिए मन बैचेन था, और आंखों में थी नमी। अचानक से नज़र पड़ी, उस पूर्णिमा के चांद पर। उसकी चांदनी ने एहसास
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