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Day: September 17, 2020

😭 मैं याद ना आई हूं😭 – रूबी शर्मा

😭 एक बार भी तुझको मैं याद नहीं आई हूं तुम सामने हो कर भी मुझे क्यों तड़पाता है तेरी याद सताती तेरी याद रुलाती

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मैं क्या लिखूं….!!!- शिवांशु द्विवेदी

ना पंक्ति मेरे पास है ना ही अधूरे अल्फाज होंगे..! कलम पड़ी है शांत मेरी पर उसके भी कुछ आगाज होंगे….!! राह बदलते लक्ष्य से

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ख्याब को हकीकत में पाया हूँ- रसस्य भाई

आगे कैसे और पीछे का कैसे, हाथ पकड़ कर चलना है दो पल है ज़िन्दगी सँवारने की निडर होकर बढ़ना है क्या हुआ बह गये

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ये दुनिया-रसस्य भाई

शर्माओ तो जीने नहीं देगी ये दुनिया ओर ना शर्माओ तो बेशर्म कहेगी दुनिया स्वयं को तड़पाओ क्योंकि तड़पायेगी ये दुनिया बिखरे हुए पलों में

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कितनो ने सताया है- रसस्य भाई

ज़िन्दगी है तो कई उतार चढ़ाव आयेंगे कभी गिरेंगे तो कभी किसीको सम्हालेंगे यह लम्हा बड़ा ही दिलचस्प और सुनहरा है कभी प्यारा है तो

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खुदका हिस्सा समझता है !!- रसस्य भाई

दो हाथ, दो पैर पाकर खुदको इंसान समझता है ! इंसानियत दिखाकर एकबार खुदको भगवान समझता है !! भगवान कैसा है, तू इंसान कैसा है

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लौट जाऊँ……..बचपन में।

दिल करता हैं। लौट जाऊँ उस बचपन में, जब में ना समझ-नादान था चेहरे पर मासूमियत-भोलापन था खेल कुद में अक्सर बीत जाता था, सारा

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