ब्राम्हण-हेमा पांडेय

ब्राम्हण-हेमा पांडेय

ब्राह्मण को ढूंढने वाली दारु तो गढ़ दगा भ्रमण के लिए जरूरी संस्कार मेहनत भाग जा ब्राह्मण को प्रिय न्याय नमन है .ब्राह्मण को अप्रिय अपमान विश्वासघात अनादर ब्राह्मण को महान बनाने वाले शरणागत दयालुता परोपकार ब्राह्मण के लिए जरूरी एकता संस्कार धर्म पालन ब्राह्मण के लिए छोड़ने वाली चीज बुरी संगत कुप्रथा आपसी मनमुटाव
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बेटी रूढ़िवादी सोच-गजेंद्र सिंह राजपुरीहित

हम ज्यादातर अपनी पसंद का काम ,इसलिए नहीं कर पाते हैं या करते हैं, क्योंकि हम चाहे-अनचाहे में समाज की आ रही रूढ़ि सोच से खुद को अलग नहीं कर पाते हैं । हम उनकी सोच की खुशी को हर हाल में बरकरार रखना चाहते हैं । नरक का भय, स्वर्ग की चाहत कि हम
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ज्ञानी कौन है -गूँजेश शर्मा

ये प्रश्न हमेशा से ही बुद्धिजीवी वर्ग के लोगो मे उठता रहा है। एवं बुद्धिजीवी वर्गके लोग ज्ञान को ही सबकुछ मानते है। और हर इक इंसान ज्ञानी बनना चाहता है। और ज्ञान पाकर ही वह बुद्धिजीवी वर्ग के सीमा में आता है। लेकिन प्रश्न ये आता है कि आख़िर ज्ञानी बनने से पहले ये
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प्रिय पापा-ललित पाटील सुनोदेकर

प्रिय पापा, पापा कैसे हो? आप का हाल पूछने के अलावा मै कर भी क्या सकता हूं। जानता हूँ पापा आप मुझसे नाराज हो, मिलने नहीं आया हूँ ना मैं आपको। क्या करू पापा अब बहूत अकेला महसूस कर रहा हूँ, गांव में था तो आप मेरे मन को पढ लेते थे। जब मैं घर
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15 अगस्त-ललित पाटील सुनोदेकर

आज सबके व्हाट्सप्प स्टेटस बहुत कुछ बया कर रहे है, पर ऐसे देश भक्ति का दिखावा कर के क्या फायदा। जवान बेटा देश के लिए मर रहा है और बूढ़ा बाप पेड़ पर लटककर जान दे रहा है। देश का युवा नौकरी की तलाश में धक्के खा रहा है और बाप उसके जाने के गम
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स्वतंत्रता के सही मायने-शोभा सृष्टि

15  अगस्त के इस शुभ अवसर पर हमे अपने प्यारे भारत को विकास के मार्ग पर निरन्तर बढा़ने हेतु स्वतंत्रता के सही मायने समझने होंगे तभी इस स्वतंत्रता का सच्चा उत्सव मनाकर वीर शहीदों की कुर्बानियों रूपी इस अनमोल धरोहर को सुरक्षित रख पायेंगे स्वतंत्रता और स्वच्छंदता का अर्थ***** एक महिला सड़क पर बेझिझक चल
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15 अगस्त-ललित पाटील सुनोदेकर

आज सबके व्हाट्सप्प स्टेटस बहुत कुछ बया कर रहे है, पर ऐसे देश भक्ति का दिखावा कर के क्या फायदा। जवान बेटा देश के लिए मर रहा है और बूढ़ा बाप पेड़ पर लटककर जान दे रहा है। देश का युवा नौकरी की तलाश में धक्के खा रहा है और बाप उसके जाने के गम
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क्या भारत सच में आज़ाद है-दीशा शाह

इस 1947 में भारत अंग्रेजो की गुलामी से आज़ाद हुआ था .ये 15 अगस्त 71 साल पुरे होने जा रहे है .देश आजाद हो गया लेकिन देशवासी अभी भी बेड़ियों के बन्धन में बन्धे हैं। ये बेड़ियां हैं अज्ञानता की जातिवाद की धर्म की गरीबी की सहनशीलता की अवधारणाओं की आदि। क्या भारत सच में
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ये आग किसने लगाई- आनंद मिलन

आग लग गई, बस्तियाँ जल गई, राखोंं के ढेर से मध्यम – मध्यम उठता हुआ धुआँ बादलों से मिल रहा है। शांत है चारों दिशाये, खामोश खड़े है पेड़ – पौधे, सुना पड़ा है गाँव का गाँव ? लाशो की ढेर लगी है, लाशो को गिनने वाला गिनती भूल रहा है। सब एक – दूसरे
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हमारी आन, हमारी शान-पूजा पाटनी

तिरंगा। हमारा आत्मसम्मान है यह तिरंगा झंडा हमारा। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हमारी पहचान है तिरंगा। जब भी कभी कोई देश के अंदर या बाहर कोई खेल प्रतियोगिता हो। तो भारतीयों की जीत पर फहराया जाता है यह तिरंगा। इस तिरंगे के तीनों रंग एक अलग ही परिभाषा रखते हैं। • केसरिया रंग- वीरता
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