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Category: आलेख

गलवान घाटी मे चीन का हमला और सरकार का रवैया- चंपा नेगी

16 17 जून को गलवान घाटी मे चीन की की हिमाकत फिर से 1962 की कड़वी याद ताजा कर गई साथ मे हमको यह सोचने

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अंधविश्वास और व्यक्ति की सोच- सुबोध कुमार मिश्रा

संसार के कोने-कोने में-चाहे वह मध्य हो या असभ्य अथवा पिछड़ा हुआ हो- समान या आंशिक रूप से अंधविश्वास प्रचलित हैं, क्योंकि मनुष्य अपने भाग्य

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आत्मनिर्भर बनो- सुबोध मिश्र।।

मनुष्य को जीवन में दूसरों पर भरोसा न कर आत्म निर्भर और आत्म विश्वासी होना चाहिए । दूसरे शब्दों में आत्म-सहायता ही उसके जीवन का

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Amrita-kumari

सिलाई मशीन एक ऐसा यांत्रिक उपकरण

सिलाई मशीन एक ऐसा यांत्रिक उपकरण है जो किसी वस्त्र या अन्य चीज को परस्पर एक धागे या तार से सिलने के काम आती है।

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जगत का जंजाल-संसृति -शिवराज आनन्द

(मनुष्यों को अपने हृदय की सु बुद्धि से दीपशिखा जलाने चाहिए।उन्हे इक दुसरे के मध्य भेदभाव डालकर मौजमस्ती नही करनी चाहिए।मौजमस्ती दो पल की भूल

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प्रेम जगत – शिवराज आनन्द

    ( ‘प्रेम जगत ‘संसार  का रंगमंच है  और  हम सभी  इस रंगमंच  के पात्र।)विज्ञो का मत है की आदि मानव ने प्रेम की आदिम आग की उष्णता से सृस्टि  की रचना की ‘आदम और हौवा या ,मनु और शतरूपा ने बाव संवेदन धड़कते प्रेम भावना के लिए स्वर्ग के संवेदन हित आनदं रस को नही अपितु जगत के कठोर जीवन को अपनाया |      ओ- ढोलमारो , लैला  मजनू , रोमिओ -जुलियर ,हीर -राँझा , की प्रेम कथाये तो यही रेखांकित करती है की प्रेम ही जीवन का सार है, प्रेम विहीन जगत वीरान है| इसी प्रेम के वशीभूत (जगत बनाने वाले ) माता (प्रकृति) व पिता (पुरुष) जगत का निर्माण किया । अतः उन्हें मेरा सहस्त्रो बार प्रणाम ! परिवारिक सुख आकाश में घटाओ के सदृस होता है| सुख उत्पन्न होता है पर चिर कल तक स्थिर नही होता उन घटाओ के सदृश ही छिप  जाता है      ‘वर्षो से मेरे आँगन में एक अंगना नही जिससे मेरी आँगन  सुनी है । ‘ऐसा ही विचार  कर ‘मनीलाल  ‘ अपने पुत्र (मधुसूदन ) क विवाह कर रहे है । असलबात मधुसूदन जब १० वर्ष का था, तब उसकी ‘जन्म जननी’ दुनिया से चल बसी । वह माँ की ममता को न पा सका- माँ की ममता उसके लिए आसमान के कुसुम हो गई ।’  मनीलाल’ मंजोलगढ़ के एक ईमानदार पुरुष है । वे सबको एक आँख से देखते है । पत्नी मृत्यु के बाद उनके आंखों से खून उतर आता – है बस याद आती … कमर तोड़ जाती । बस उसी के याद को भुलाने और दुःख के आंसु को सुख में बदलने के लिए ही वे अपने पुत्र का विवाह कर रहे है ।मधुसूदन का विवाह सुमन के साथ हो रहा है । ‘सुमन’ एक सजिली लड़की है । वह विदितनारायण की पुत्री है । ‘विदित

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संतोष सिंह " क्षात्र "

पर्यावरण का संवर्धन हमारे हाथ

परि एवं आवरण के सम्मिलन से पर्यावरण शब्द बना है! जिसमें परि का अर्थ चारों ओर तथा आवरण का अर्थ है ढकना अर्थात पृथ्वी चारो

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Paragi-Gupta

कोरॉना ने आतंक मचाया है ,ना आए साल कोई ऐसा…..

फिर ना आए साल कोई ऐसा जनवरी बिता उमंगों में फरवरी में उदासी छाई।। मार्च बिता निराशा में फिर बारी अप्रैल की आई ।। इसने

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Paragi-Gupta

कहो तुझे क्या कहूं…… पीड़ा कहूं या कहूं संहार

शा. अहिल्याश्रम कन्या उ मा विद्यालय क्रं २ इंदौर (स्वरचित कविता) तुझे क्या कहूं बीमारी कहूं कि बहार कहूं पीड़ा कहूं कि त्यौहार कहूं संतुलन

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