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जनम-जनम का साथ

जनम-जनम का साथ है तुम्हारा हमारा……तुम्हारा हमाराऽऽऽऽ…….बहुत बहुत शुक्रिया दोस्तों!”ताहिर ने ज्यों ही गाना पूरा किया,उसका ध्यान ऑडियन्स में बैठी अपनी पत्नी नज़्म पर गया,जो एक टक उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।गाना ख़त्म हो चुका था,नज़्म ताहिर को देखे जा रही थी।आस.पास के लोग दोनों को देखकर हंसने लगे। ताहिर थोड़ा झिझका। वह स्टेज से नीचे उतरा और नज़्म के सामने आकर खड़ा हो गया।
नज़्म अभी भी उसी की आंखों में देख रही थी। ताहिर ने नज्म की आंखों के सामने चुटकी बजाते हुए कहाएश्हैलो मिसेज़ जी!कहां खो गईं आप?”बस तभी नज़्म की बेख़ुदी टूटी।”कुछ नहीं।”वो शर्माती हुई बोली।”चलें?” ताहिर ने पूछा तो नज़्म ने हां में सिर हिला दिया।
हाॅल से बाहर आकर दोनों बाग़ में टहलनें लगे।रात के 10 बज रहे थे।ठंडी हवा और हरियाली की खुशबू नज़्म की संजीदा आंखों में और संजीदगी भरने लगी। नज़्म अभी भी खोई हुई थी।ताहिर ने उसका हाथ अपने हाथों में लिया तो वो फिर से ताहिर की आंखों में डूब गई।ताहिर ने परिस्थिति को समझने की कोशिश में पूछा,”क्या ढूंढ रही हो नज़्म?””ढूंढ नहीं रही हूं,याद करने की कोशिश कर रही हूं,वो जन्म जब से तुम मेरे शौहर हो।पीछे का हिसाब बेहिसाब दिखता है।जन्मों से जन्मों तक तुम मेरे साथ हो,सोचकर बड़ा सुकून मिलता है।आजकल कितना अजीब माहौल बना दिया लोगों ने।एक तरफ तीन तलाक और हलाला जैसी इल्लोजिकल मज़हबी बातें,दूसरी तरफ देशभर में इस पर छिड़ी बहस की आग जो फैलती ही जा रही है।ना जाने कैसे लोग हैं जो इश्क़ को समझौता और बेवफाई को सियासत बनाए जा रहे हैं। सोचती हूं तो घुटन सी होती है।पर तुम्हारी आंखें आफ़ताब बनकर इस घुटन के अंधेरे को पी जाती है। क्यों नहीं अल्लाह ने हर शौहर को तुम्हारे जैसा बनाया?”
नज़्म का यह मासूम सवाल ताहिर की आंखों में मोहोब्बत का दरिया बनकर बह पड़ा।नज़्म को सीने से लगाते हुए ताहिर बोला,”हमारी वफा का पैमाना ना पूछ ऐ ग़ालिब!हमने तालीम.ए.इश्क़ अपनी महबूबा से पाई है।” नज़्म ने आज फिर अपनी रूह को ताहिर के हवाले कर दिया।

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Riddhika-Acharya

Riddhika-Acharya

Writing singing study... Happy life🤘

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