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छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग के 20 बरस-वीरेंद्र देवांगना

छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग के 20 बरसःः
1962 में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म ‘‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’’ की शानदार सफलता के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा में पहली फिल्म 16 अप्रैल 1965 में मनु नायक की ‘कहि देबे संदेस’ रायपुर, भाटापारा व बिलासपुर में रिलीज हुई थी।
तब यह फिल्म महज 27 दिन में बनी थी, लेकिन ब्राह्मण और दलित प्रेमकहानी को लेकर विवाद हो गया था, जिसका निराकरण फिल्म देखकर तात्कालीन सूचना व प्रसारणमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था। उन्होंने फिल्म की सराहना कर दी, तो विवाद ही स्वतः समाप्त हो गया था।
1970 में दूसरी फिल्म ‘घर-द्वार’ आई। इसके गीत-गोदा फुलगे मोर राजा…। सुन-सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे…और झन मारो गुलेल…। ने प्रदेशभर में तहलका मचा दिया था। इस फिल्म के गीतों को स्वर्गीय मोहम्मद रफी ने भी अपनी आवाज दी है। इसके बाद 30 साल तक फिल्म निर्माण के क्षेत्र में खामोशी छाई रही।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के ऐन पांच दिन पूर्व 27 अक्टूबर 2020 को तीसरी मूवी निर्माता सतीश चंद्राकर व निर्देशक सतीश जैन की ‘मोर छइहां भुइयां’ रायपुर के बाबूलाल टाकीज में रिलीज हुई, तो रिलीज होने के बाद के संडे छह शो चली। फिर 100 दिन तक पांच शो, बाद के 6 महीने तक 4 शो चलती रही। वस्तुतः, मोर छहहां भुइयां’ ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा के अच्छे दिन ला दिए। इसी फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए अभिनेता रामानुज (अनुज) शर्मा को पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया।
इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी के बाद 20 सालों में अब छालीवुड फिल्म उद्योग 100 करोड़ का हो गया है। छत्तीसगढ़ी फिल्में 20 लाख से लेकर 1 करोड़ की बजट में बन रही हैं।
हर साल 25-30 छत्तीसगढ़ी फिल्में और 5 हजार से ज्यादा छत्तीसगढ़ी गीत बन रहे हैं। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। अब छत्तीसगढ़ी फिल्में हिंदी सिनेमा की तर्ज पर ओटीटी प्लेटफार्म में भी देखने को मिलेंगी।
छत्तीसगढ़ी फिल्म शूटिंग से लेकर एडिटिंग तक आत्मनिर्भर है। कहानी छत्तीसगढ़ी भाषा के जानकार लेखक लिखते हैं, गीतकार व गायक यहीं के हैं। कोरियाग्राफर, मेकअप आर्टिस्ट, स्पाटब्वाय आदि सब छत्तीसगढ़िया होते हैं। सिर्फ संेसर सर्टिफिकेट के लिए मुंबई जाना पड़ता है।
जानकारों के अनुसार, अब तक छत्तीसगढ़ी भाषा में 250 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं, जिसमें मया देदे मया लेले, मयारू भौजी, परदेसी के मया, टूरा रिक्शावाला, मया देदे मयारू, लैला टिपटाप छैला अंगूठा छाप, झन भूलव मां बाप ला, राजा छत्तीसगढ़िया, बीए फस्र्ट ईयर, आई लव यू, आई लव यू पार्ट-2, महंू कुंवारा तहूं कुंवारी, हंस झन पगली फंस जबे, मया जैसै फिल्में सुपरहिट रही हैं।
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के मुख्य अभिनेता को 5 से 10 लाख, तो अभिनेत्री को डेढ़ से ढ़ाई लाख तक फीस दी जाती है। अन्य कलाकारों को किरदार के अनुसार 5 हजार से 1 लाख तक फीस मिलती है।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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