अकेला होने की आदत-दिशा शाह

अकेला होने की आदत-दिशा शाह

ज़िन्दगी में अकेला होने की आदत हमेशा रखनी चाहिए क्यू की हर जगह हर समय कोई साथ हो ऐसा कभी हो ही नहीं सकता है . आदत ऐसी नहीं होती तोह कभी कभी हम कतराते है , अजीब फील होता है . क्यों होता है ऐसा क्यों की कभी भी अकेले खुद पर समय नहीं बिताया होता है . इसलिए ऐसा होता है .इसलिए रोजाना जितना घंटा हो सके खुद को समय देना चाहिए . इससे अंदर से ख़ुशीभी मिलेगी हम को . अंदर से भी मजबूत होंगे. क्यों की ज़िन्दगी में अकेले चलने से ही सफलता प्राप्त होती है . हमेशा हर जगह कोई साथ नहीं रेह सकता .हमें कोई दूसरा प्रोफेशन में आगे बढ़ना हो सामने वाले को कोई दूसरा प्रोफेशन में आगे बढ़ना हो तोह हमें अकेले ही बढ़ना होता है . सब का नजरिया अलग होता है , सब कुछ अलग होता है . हमें अकेला जीने की आदत रखनी चाहिए . आखिर हम अकेले ही दुनिआ में आये थे और अकेले ही जाएंगे ये कठोर सच है इस दुनिआ का हमको स्वीकार करना पड़ेगा . इसलिए भले दुसरो के साथ समय बिताए  , अकेले होने से कभी घभराना नहीं चाहिए . ज़िन्दगी में काफी आगे बढ़ना है अभी तोह ट्रेलर है ज़िन्दगी का पिक्चर अभी बाकि है मेरे दोस्त. इसलिए खुद की नजरो में उठना बोहोत जरुरी है . अकेले रहने की अकेले जीने की अकेले आगे बढ़ने की आदत होनी जरुरी है . तब ही हम ज़िन्दगी में आगे बद पाते है .

दिशा शाह 

Disha Shah

Ravikant Agarwal

मैं रविकांत अग्रवाल पुणे महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवी हूँ। मैं साहित्य लाइव में मुख्य संपादक तथा दिशा-लाइव ग्रुप मे प्रेस प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ।

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comments
  • जी शब्दो पर थोड़ा ध्यान दीजिए

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  • ya lkn jo samj mei aa jaye aisa vi likhna chahiyen q ki kbhi shabd smj mei nhi aate hai logo ko

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