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अमेरिका में सत्ता-परिवर्तन और भारत-वीरेंद्र देवांगना

अमेरिका में सत्ता-परिवर्तन और भारत::
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन से रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड टंªप की हार से यही साबित होता है कि अमेरिका का बहुसंख्यक मतदाता हर चार साल बाद प्रायः सत्तारूढ़ पार्टी में परिवर्तन देखना चाहता है। यह दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र का सबल संकेत है कि मताधिकार के माध्यम से कुव्यवस्था को सुव्यवस्था में बदला जा सकता है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड टंªप की हार का एक बड़ा कारण कोरोना के आसन्न खतरे के प्रति उनकी लापरवाही को मानी जा रही है, जिसके कारण शक्तिसंपन्न और धनसंपन्न अमेरिका में लाखों नागरिकों की मौत हो गई है। दूसरे उनका बड़बोलापन, अफगान नीति, आतंकवाद के प्रति सख्त कदम न उठाना और चीन के प्रति डुलमुल रवैये को भी माना जा रहा है।
जो अमेरिका दुनिया को एक नहीं कई-कई बार नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता हो, वह कोरोना जैसी अदृश्य महामारी के सामने हथियार डाल दे, यह अमेरिकियों को नामंजूर था।
अमेरिका दुनिया की जहां सैन्य व आर्थिक महाशक्ति है, वहीं उसकी नीतियां दुनिया के कोने-कोने में असरकारी है। उससे कोई देश, फिर चाहे इरान, उत्तर कोरिया, रूस या चीन हो, सीधे तौर पर पंगा लेने की जुर्रत नहीं करता।
वहीं वह बहुतेरे देशों को अपना व्यापारिक व सामरिक साझेदार समझता है।
जिन देशों को वह अपने खेमे का समझता है, वह उन्हें संरक्षण भी देता है। यही कारण है कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ और नाटो का संस्थापक सदस्य देश होने के नाते इन्हें संरक्षित करता है।
अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऐसा चीन के विश्वासघात के कारण हुआ है। चीन की अधिकांश चीजों पर भारत सरकार ने पाबंदी लगा दी है। इसी तरह रूस के बाद रक्षा के क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश अमेरिका है।
भारत के लिए वर्तमान परिवेश में अच्छी बात यह कि कमला हैरिस, जो भारतीय-अफ्रीकी मूल की हैं, वह अमेरिका की उपराष्ट्रपति बन रही है। इसी के साथ दर्जनों ऐसी भारतीय मूल की शख्सियतें हैं, जो जो बाइडन की सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। इनसे देर-सबेर भारत को फायदा ही होनेवाला है।
भारत वर्तमान मंे अमेरिका से एयरक्राफ्ट, मिसाइलें, इंजन, एयर डिफेंस सिस्टम, आर्मर्ड व्हीकल और युद्धपोत खरीद रहा है। चीन के विस्तारवाद को रोकने के लिए अमेरिका की पहल पर क्वाड संगठन बना है, जिसका आस्ट्रेलिया, जापान और भारत सहित अमेरिका भी सदस्य है।
राजग के कार्यकाल के छह वर्ष में अमेरिका-भारत संबंध जितने बेहतर हैं, उतने कभी नहीं रहे। आज पाकिस्तान व चीन जैसे आततायी मुल्क यदि भारत से पंगा लेने से हिचक रहे हैं, उसके मूल में भारत-अमेरिका संबंधों की नई इबादत है, जिसका श्रेय राजग की तीव्रगामी विदेश नीति को जाता है।
इसी तीव्रतम और तीक्ष्णतम विदेश नीति का सुपरिणाम है कि किसी समय केवल रूस के भरोसे रहनेवाला भारत आज दुनिया में चीन-पाकिस्तान को छोड़कर सबके साथ है और सब उसके साथ के लिए लालायित रहा करते हैं।
यही कारण है कि भारत एक जिम्मेदार मुल्क के रूप में न केवल संयुक्त राष्ट्र संघ, अपितु आसियान, बिम्सटेक, दक्षेस, क्वाड, जी-20, आरसेप, मुस्लिम देशों के संगठन आदि में सम्मानजनक स्थान रखने लगा है।
अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देश उसके शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को सुनना और उसको महत्व देना चाहते हैं।
आतंकवाद के चलते पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध लगभग खत्म हो गए हैं। हालांकि अमेरिका-पाक संबंध उसी समय खत्म हो जाना चाहिए था, जब अमेरिका ने अपने सबसे बड़े दुश्मन ओसामा बिन लादेन को पाक में मार गिराया था, लेकिन देर आए, दुरुस्त आए की तरह इसी से संतोष करना पड़ेगा कि चलो अब अमेरिका की आंख खुली है।
इसी का लाभ भारत को मिला है। इसलिए अमेरिका भारत को किसी स्थिति में भी कम महत्व देना गंवारा नहीं कर रहा है।
वह अपनी अफगान नीति, आतंकवाद, एच-1बी वीजा, पेरिस समझौता, हिंद-प्रशांत रणनीति, व्यापारिक रिश्ते, रक्षा मामले में फिर से पुनर्विचार कर सकता है, जो भारत के हित में ही होगा।
उम्मीद की जानी चाहिए कि राजग सरकार के रहते भारत-अमेरिकी संबंध फिर परवान चढ़ेगा और दुनिया को नई राह दिखाएगा।
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आसियान
आसियान-दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संगठन है, जिसके 10 सदस्य देश-इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया हैं। आसियान संगठन की स्थापना 8 अगस्त 1967 को थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में हुई थी।
आसियान का आदर्श वाक्य है-वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी। आसियान का सचिवालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है।
आसियान का उद्देश्य-
1. दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक विकास में तेजी लाना।
2. क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना।
3. विभिन्न क्षेत्रों के समान हितों की प्राप्ति के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना।
4. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के साथ घनिष्ठ और लाभप्रद संबंध बनाना।
5. क्षेत्रीय विकास का ध्वजवाहक बनाना।
आसियान के कामकाज का तरीका
1. आसियान के अध्यक्ष प्रतिवर्ष वर्णक्रम के अनुसार बदलते रहते हैं।
2. आसियान का शिखर सम्मेलन साल में दो बार होता है, जिसके माध्यम से नीतियों और उद्देश्यों का दिशा निर्धारण किया जाता है।
3. प्रत्येक निर्णय परामर्श व सहमति से लिए जाने का रिवाज है।
4. आसियान क्षेत्रीय मंच 1993 मंे आरंभ हुआ। 27 सदस्यीय यह समूह राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सहयोग के लिए विकसित हुआ।
5. आसियान प्लस-3 को 1997 में आरंभ किया गया। यह परामर्श समूह है, जिसमें चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को शामिल किया गया है।
6. पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन 2005 में पहली मर्तबा आयोजित किया गया।
आसियान और भारत
आसियान, भारत की एक्ट ईस्ट पालिसी का आधार स्तंभ है। भारत एक्ट ईस्ट पालिसी के तहत आसियान के सदस्य देशों के साथ धनिष्ठ संबंध रखता है। भारत आसियान का डायलाग पार्टनर 1996 में, समिट पार्टनर 2002 में और स्टैªटजिक पार्टनर 2012 में बना। आसियान का शिखर सम्मेलन वियतनाम में 12 नवंबर 2020 को हुआ, जिसमें वियतनाम के प्रधानमंत्री गुएन युआन फुक के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसियान-इंडिया वर्चुअल समिट की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की।
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