भारतीय अर्थव्यवस्था-दीशा शाह

भारतीय अर्थव्यवस्था-दीशा शाह

आज के समय में पैसा इतना आवश्यक हो गया है की लोगो को केवल पैसो से मतलब है .भारत की संस्कृति मर्यादा ,विनय, विवेक , बड़ो छोटो के साथ आज कल ये नहीं दिखाई दे रहा है . लोगो को सिर्फ पैसा को जरुरी समजते है . इज्जत मर्यादा मानसन्मान सब भूल गए है . ये बात सच है आज कल महंगाई बोहोत बढ़ गयी है . आम आदमी मर्यादा के लिए बड़ी चुनौती का सामना कर ना पड़ता है .अर्थ व्यवस्था मजबूत होना बोहोत जरुरी है .आज के समय में . इसका मतलब ये नहीं की हर जगह हम पैसा को ही अमूल्य दे . हमारे बाते मर्यादा जज्बात मर्यादा सोच बदलनी जरुरी है ,आने वाले समय में .पैसा सिर्फ जरूरियात पूरी करने के लिए होता है . इसका मतलब नहीं हम अपने मगज में पैसा ही होगा .
और दुसरो के साथ बस अपने मतलब से बात करेंगे ये अच्छी बात नहीं होती है . हमारे संस्कार मर्यादा संस्कृति रेपुटेशन का सोचना बोहोत जरुरी होता है . नहीं तोह हम् पैसो के वजह से गलत रास्ते में भटक जाएंगे . हमारे अंदर विनय विवेक नहीं घमंड अभिमान जन्मेगा . इससे खुशी मिलती ही नहीं हम नहीं सन्तुष्ट होते है ,बस दिखावा करते है खुश है . इसलिए विनय विवेक बोहोत जरुरी होता है , वो ही असली पेहचान दिलाता है हमें .

 

     Disha Shah     दीशा शाह
  कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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