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बिमस्टेक::-वीरेंद्र देवांगना

बिमस्टेक::
नेपाल की राजधानी-काठमांडो में 30-31 अगस्त 2018 को चैथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का थीम था-‘शांतिपूर्ण, समृद्ध और दीर्धकालिक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की ओर’।
उल्लेखनीय है कि 6 जून 1977 को बैंकाक घोषणापत्र द्वारा बिम्सटेक क्षेत्रीय संगठन की स्थापना की गई थी। इसका मुख्यालय बंांग्लादेश की राजधानी ढाका है। इसके पांच सदस्य देश दक्षिण एशिया से हैं-बांग्लादेश, भारत, नेपाल, श्रीलंका और भूटान। म्यांमार और थाईलैंड दक्षिर्णी-पूर्वी एशिया के देश भी इसके सदस्य हैं।
बिम्सटेक का पूरा नाम-वे आफ बंगाल इनिशिएटिव फार मल्टी सेक्टोरल टेक्नीकल एंड इकानामिक कोआपरेशन है। इस संगठन का मकसद है-बंगाल की खाड़ी के तट के साथ मौजूद दक्षिण और दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग स्थापित करना।
संगठन के सातों देश 15 अलग-अलग क्षेत्रों में मिलजुल कर काम करते हैं, जिनमें टेलीकाम, पर्यटन, परिवहन, कृषि, पर्यावरण, आतंकवाद, गरीबी और जलवायु परिवर्तन प्रमुख हैं। कहा जा रहा है कि यह सम्मेलन सार्क से बढ़कर है।
इस सम्मेलन में आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा करार देते हुए भारत सहित छह अन्य बिम्सटेक देशों ने आव्हान किया कि इस बुराई को बढ़ावा व समर्थन देनेवाले, वित्तपोषण करनेवाले, आतंकवादियों को शरणस्थल उपलब्ध करानेवाले, गलत प्रशंसा करनेवाले तत्वों की पहचान कर उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
भारत की आवश्यकता
भारत के कुछेक राज्यों को छोड़कर बाकी राज्यों की सीमाएं चीन, पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं को छूती हैं। ये सीमाएं घनघोर जंगल, नदी, पहाड़, मरुस्थल, तराई-घाटी जैसे दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में हैं।
भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में बंगाल की खाड़ी व अरब सागर है, जिसका समुद्रीमार्ग पाकिस्तान, मालदीव, श्रीलंका, इंडोनेशिया, म्यांमार, बांग्लादेश और थाईलैंड की सीमा को स्पर्श करती है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर शेष पांच देशों से भारत ने समुद्री सीमा समझौता किया है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम की सीमाएं म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान से लगती हैं।
जाहिर है कि बिमस्टेक भारत को विभिन्न मुद्दों से निपटने के लिए संशोधित क्षेत्रीय मंच उपलब्ध कराता है। इसलिए यह संगठन भारत के लिए सार्क से ज्यादा महत्वपूर्ण और असरदायक हो गया है।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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