देश में किसान की हालत-दिशा शाह

देश में किसान की हालत-दिशा शाह

आज की बढ़ती जिन्दगी में किसान की हालत बोहोत गंभीर होती  जा रही है . किसान पुरे साल खेती करते है .दिन रात मेहनत करते है . फिर भी पैट भरने लायक खाना नहीं मिलता है . किसान गर्मी हो या ठंडी कठोर परिश्रम करते है ,कठोर धुप में खेती करना पड़ता है , ज़्यादा ठंडी में काम करना पड़ता है . फिर भी रहने  लायक घर नहीं मिलता है .किसान अपने बच्चो को दो व्यक्त का खाना भी नहीं खिला पाते है , कपडे भी नहीं खरीद पाते है , बच्चो को सही शिक्षा भी नहीं दे पाते है . अपनी पत्नी को गहने पहऩऩे का सुख नहीं दे पाते है . किसान की पत्नी कपड़े के कुछ टुकड़े के साथ प्रबंधित करने के लिए है पत्नी भी , काम करती है , गोशाला साफ़ करती है , गाय के गोबर बनाकर दिवारो पर चिपकाती और उन्हें धूप में सूखाती है . कभी कभी फसल कर के भी बारिस नहीं होती है तोह किसान का बोहोत नुकसान होता है . और समय से बाजार  में सब्जी नहीं आ पाती है तोह ,  सब्जी महंगी हो जाती है .किसान की अगर खुद की खेत हो तोह इतनी तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता है , यही अगर दुसरो के खेत में काम करते है तोह , बोहोत तकलीफे का सहन करना पड़ता है . दिन रात  मेहनत करते है . फिर भी गरीबी मिट टी नहीं है .गरीबी के कारन   किसान आत्महत्या करते है . गरीबी से लाचार हो कर ये खतरनाक कदम उठाते है किसान . किसान का अधिकार मिलना चाहिए . आज हम खा पाते है , पि पाते है वो सिर्फ किसान के वजह से हम अच्छी ज़िन्दगी जी रहे है .आखिर हमें अच्छी ज़िन्दगी मिल रही है तोह एक किसान को भी अच्छी ज़िन्दगी मिलनी चाहिए . एक किसान को रहने लायक घर , बिजली. पानी की सुविधा होनी चाहिए .और उसके बचे की शिक्षा भी मिलनी  चाहिए . किसान हमारे देश की शान है .उसका हक़ मिलना चाहिए .

दिशा शाह 

 

Disha Shah

Ravikant Agarwal

मैं रविकांत अग्रवाल पुणे महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवी हूँ। मैं साहित्य लाइव में मुख्य संपादक तथा दिशा-लाइव ग्रुप मे प्रेस प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ।

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