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दुष्कर्म पर एडवाइजरी-वीरेंद्र देवांगना

दुष्कर्म पर एडवाइजरी::
हाथरसकांड सहित देशभर में दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि राज्यों को दुष्कर्म के मामले में केंद्र के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। दुष्कर्म की शिकायत पर निश्चित रूप से एफआइआर दर्ज की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में जांच दो महीने में पूरी होनी चाहिए। दुष्कर्म के सबूत वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित किए जाने चाहिए।
वहीं, केंद्र ने यह भी कहा है कि जांच में कोताही बरतनेवाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। लापरवाही करनेवाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ आइपीसी और सीआरपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अधिकारक्षेत्र के विवाद की स्थिति में पुलिस शिकायत मिलते ही शून्य प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बाध्य है।
एडवायजरी में यह भी कहा गया है कि डायरेक्टरेट आफ फोरेंसिक साइंस सर्विसेज पहले ही दुष्कर्म के मामले में बतौर साक्ष्य नमूनों के इकट्ठा करने, सुरक्षित करने और ले जाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर चुका है।
साथ ही, केंद्र ने इन्वेस्टीगेशन टैªकिंग सिस्टम फार सेक्सुअल आफेंसेज के आनलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है।
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय का 7 जनवरी, 2020 का फैसला है कि मौत के समय दिया गया बयान न्यायिक समीक्षाओं को पूर्ण करता है, तो उसे इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि उसे मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज नहीं किया गया है या पुलिस अधिकारी को बयान देने के समय वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने सत्यापित नहीं किया है।
उधर, चंडीगढ़ हाईकोर्ट का कहना है कि यदि दुष्कर्म की घटना में शिकायत करने में देरी हुई है और एफआइआर दर्ज करने में कई महीने लग गए हैं, तो पर भी आरोपित अग्रिम जमानत का हकदार नहीं बन सकता।
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