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गावों के लिए स्वामित्व योजना-वीरेंद्र देवांगना

गावों के लिए स्वामित्व योजना::
संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक नानाजी देशमुख की जयंती के अवसर पर ग्रामीणों के संपत्ति के अधिकार को नई ऊंचाइयां देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना की शुरूआत 11 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली से की है।
योजना के तहत 6 राज्यों के 763 गांवों के 1 लाख परिवारों को संपत्ति कार्ड का प्रारंभ वर्चुअल प्लेटफार्म से किया गया। इन ग्रामीणों ने मोबाइल पर आए एसएमएस से संपत्तिकार्ड डाउनलोड किया, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अगले तीन से चार वर्षों में देश के हर ग्रामीण परिवार को संपत्ति कार्ड देने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वामित्व योजना का आरंभ जिन राज्यों के गांवों से वर्चुअल प्लेटफार्म से की गई, उनकी संख्या इस प्रकार है-उत्तरप्रदेश 763 गांव, हरियाणा 221 गांव, महाराष्ट्र 100 गांव, उत्तराखंड 50 गांव, मध्यप्रदेश 44 गांव और कर्नाटक 2 गांव।
इस अवसर पर वर्चुअल प्लेटफार्म से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘गांव के नौजवान कुछ करना चाहते हैं, लेकिन घर होते हुए भी बैंक से कर्ज मिलने में दिक्कत होती थी। स्वामित्व योजना के तहत बना संपत्तिकार्ड इसे आसान बनाएगा।’’
उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों तक गांवों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था, उनकी सुध अब ली जा रही है। विवादों में उलझे ग्रामीण न अपना विकास कर पा रहे थे, न समाज का। अब, बिना विवाद संपत्ति खरीदने-बेचने का रास्ता संपत्तिकार्ड से साफ होगा। आगे ड्रोन से मैपिंग व सर्वेक्षण कर सटीक भूमि रिकार्ड बनाया जाएगा। ये संपत्तिकार्ड आधारकार्ड की तरह काम आएंगे।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश यह सच समझने लगा है कि कुछ लोग सिर्फ विरोध के लिए विरोध करते हैं। ऐसे लोग नहीं चाहते कि किसान बचैलियों से मुक्त हों। उन्हें किसान और खेत मजदूर को मिल रही बीमा व पेंशन जैसी सुविधाओं से परेशानी है, वे कृषि सुधारों के विरोध में हैं। किसान उनका सच जान गया है। बिचैलियों के दम पर राजनीति करनेवाले नए कृषि कानूनों के खिलाफ है।
वाकई, गांव के लोगों को उनकी आवासीय जमीन का मालिकाना हक देना उतना ही जरूरी था, जितना कि बंदोबस्त कर उनके खेती योग्य जमीन का मालिकाना हक देना। यह काम तो आजादी के बाद ही हो जाना चाहिए था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने ध्यान क्यों नहीं दिया, समझ से परे है। इससे गांव के लोगों में आत्मविश्वास जागेगा।
स्वामित्व योजना से लाभांवित होनेवालों की संख्या करोड़ों में होगी, क्योंकि भारत गांवों में बसता है। गांवों में भारत के कुल आबादी का 65 फीसदी लोग रहते हैं, जो 7 लाख से अधिक गांवों में बसे हुए हैं।
योजना का क्रियान्वयन हालांकि आधुनिक तकनीक के माध्यम से होगा, लेकिन देशभर के गांवों को तीन-चार साल के भीतर लाभांवित करना उतना आसान नहीं है, जितना कि समझा गया है। कारण कि अमला तो राज्य सरकारों का ही लगेगा, जो अढ़ाई दिन चले ढ़ाई कोस की कहावत को चरितार्थ करते रहते हैं।
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