हिंदी भाषा का महत्त्व-दिशा शाह

हिंदी भाषा का महत्त्व-दिशा शाह

आज के समय में हिंदी भाषा को कोई माहत्व नहीं देते है . कितने ऐसे लोग है ,उन्हें हिंदी लिखना तोह दूर की बात है , बोलना भी नहीं आता है . आज कल अंग्रेजी भाषा बोहोत आवश्यक है , यहाँ हिंदी भाषा की कोई वैल्यू नहीं है , हिंदी को कोई पूछता भी नहीं है . हमारे देश की मातृ भाषा है हिंदी .
और बात आती है , साहित्य की , हिंदी भाषा बिना साहित्य अधूरा है , साहित्य बीना हिंदी भाषा अधूरी है . लोग फ़ायदा और नुकशान देखते है , लोग साइंस को मानते है , अपनाते है , लोग साहित्य को क्यों , अपनाते नहीं . साहित्य लोगो की अंदर बुराई को , विनास करता है . लोगो के अंदर अच्छाई खिलती है . लोगो की सोच में सुधार आता है . खुद बदलते है . रिश्ते मजबूत होते है . ज्यादातर युवाओ को हिंदी पढ़ना बिलकुल भी पसंद नहीं है. बोरिंग लगता है. अंग्रेजी भाषा को ज्यादा पसंद करते है . ये सवाल किसी भाषा को नहीं उपयोग करना , ये बात नहीं है , अंग्रेजी सीखो बोलो , लेकिन हिंदी भाषा को सबसे पहले मानसन्मान देना चाहियें . हिंदी भाषा को अपना हक़ मिलना चाहियें .
जब अंग्रेजी नहीं आता तब कितनी शर्म की बात होती है , यहां हिंदी नहीं आता ,तोह कुछ फर्क ही नहीं पड़ता है .
चीन , जापान , फ्रांस , इंग्लैंड , सब से पहले अपनी भाषा का महत्व देते है . हम क्यों नहीं कर सकते है. भले शुद्ध हिंदी ना आती हो लेकिन बेसिक , हिंदी तोह आनी चाहिए , कुछ भी पढ़ना जो अच्छा लगे वो तोह करना चाहियें, कम से कम . हिंदी देस की शान है ,और साहित्य देश का गौरव है . इसको हम आने वाले कल में उच्चाई तक लेके जा सकते है . ये सिर्फ और सिर्फ हमारे हाथ में है. हमें हिंदी भाषा और साहित्य को महत्व देना है या नहीं .

 

Disha Shah

 

दीशा शाह
कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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