जलता कश्मीर – अंकित कुमार दुबे

जलता कश्मीर – अंकित कुमार दुबे

आइए देश के उस धरती के नक्शे से आपको रूबरू कराते हैं, जिसको स्वर्ग की धरती कश्मीर के नाम से जानते हैं। धारा 370 की बात हो या जवानों के शहीद की। सुजात बुखारी की हत्या हो या आतंकी हमला, या बात हो युवाओं के हाथ में पत्थर की। कश्मीरी पंडित के बेघर होने से लेकर स्वर्ग पर सियासत तक का नजरिया कुछ और ही बयां करता है। राज्य एक है परंतु पूरे भारत का नक्शा उस धरती में छिपा हुआ है। जलता कश्मीर या दाग़दार होता देश। आज के लेख में मेरा नजरिया कश्मीर को लेकर कुछ और ही बयां करेगा। किस कदर कश्मीर बदसूरती की आग में जल रहा है आज हर शब्द उसकी झूठी खूबसूरती से पर्दा उठा कर बदसूरती को धरातल पर खड़ा करेगा।

बड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है “कश्मीर की कश्मीरियत” का। जो कल तक स्वर्ग की घाटी थी । जिसकी खूबसूरती को निहारने के लिए देश-विदेश से लोग चल कर आते थे, अचानक ऐसा क्या हुआ उसकी खूबसूरती में , निहारने वालो के पांव थम से गए। सांसे उनका साथ देना छोड़ दी, खूबसूरती उसकी कहीं विलुप्त सी हो गई।

एक लंबा सफर बीत गया भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर की ताना-तानी को लेकर। हमेशा से पाकिस्तान अपने नापाक इरादों के बदौलत कश्मीर की धरती पर आतंकी साजिश को अंजाम देता रहा। परन्तु उसके हर मनसूबे नाकामयाब साबित होते चले गए। हद तो तब हो गयी जब उसने कश्मीर की सुंदरता को बदसूरती की आग में झोंकने का फैशला कर लिया, और इस मंसूबे का ढाल कश्मीर के युवाओं को बनाया उनके हाथ मे पत्थर थमा कर।

कश्मीर पर कुछ भी लिखने या अपना नज़रिया व्यक्त करने से पहले पूरे भारत का जो भयभः तस्वीर उभर कर सामने आता हैं, उसको देखने के बाद पूरे रोंगटे सहम जाते हैं और कलम ख़ामोश हो जाती हैं।

कश्मीर की धरती पर जहाँ जन्नत जन्म लेती हैं, उसी धरती पर आतंकी, पत्थरबाज औऱ बलत्कारी भी सांसे लेते हैं। ये धरती कश्मीर की ही है जहां पर अपने देश का तिरंगा पांव के नीचे और पाकिस्तान का झंडा हाथों में लेकर इंडिया गो बैक के नारे लगाए जाते हैं। युवाओं के हाथ में पत्थर जवानों पर हमेशा ही बरसते रहते हैं।

कश्मीर के बारे में जो बोला उसके जुबान काट लिए गए। देश की रक्षा करने वाले कंधे पर पत्थर बरसाए गये। सच लिखने वालों की सांसे रोक दी गयी। अगर दांस्ता कश्मीरी पंडित के बेघर होने से लेकर कठुआ रेप कांड तक का वर्णन करने लगे तो कश्मीर का नक्शा गूगल मैप पर आप सब को बदला हुआ नजर आएगा।

लंबे समय से कश्मीर के बिगड़े हालात की खबर तो सभी को हैं। मीडिया द्वारा भी समय-समय पर लोगो को स्थिति से वाकिफ कराया गया हैं। लेकिन वहाँ के परेशानियों से जूझ रहे लोगो को कब निज़ात मिलेगा अभी यह अंदेशा बना हुआ हैं।

आतंकी बुरहान वानी के मौत के बाद घाटी की स्थिति बद से बदतर होती चली गई। खूबसूरती दाग़दार हो गई और घाटी में आतंकी हमलावर बढ़ते चले गए।

लेफ्टिनेंट हुड्डा ने बताया कि पहले भी संकेत थे कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति प्रतिकूल मोड लेने जा रही है। इसके दो प्रमुख कारण थे पहला कारण पाकिस्तान ने जिसे 2010 के बाद लगातार सुधार देखकर माहौल को खराब करने की कोशिश की ,यही वजह है कि युद्ध विराम के उल्लंघन घुसपैठ के प्रयास और सुरक्षाबलों पर हमलो में बढ़ोतरी देखने को मिली। घाटी के भीतर आतंकवादी रैकों में लोकल भर्ती में भी 2014 में बढ़ोतरी देखी गई । इसके बाद हर बार जब कोई स्थानीय आतंकवादी मारा गया तो उसने आक्रोश बढ़ा दिया । यह गुस्सा जल्द सड़कों पर बाहर दिखने लगा। दूसरे सोशल मीडिया का इस्तेमाल झूठे प्रचार के लिए किया जा रहा था । बुरहान वानी की छवि को बेवजह चमकाने में सोशल मीडिया ही जिम्मेदार है । इन सभी वजहों ने एक साथ मिलकर 2016 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की जाहिर है इसके बाद हुई हिंसा आसानी से नहीं भुलाई जा सकती है। यह बातें तो लेफ्टिनेंट डीएस हुड्डा की जुबानी थी, जो कश्मीर की कश्मीरियत को बड़े करीब से देखते आ रहे हैं और उसके बिगड़ते हालात को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

कश्मीर में जिस तरह से हिंसा की वारदात लगातार बढ़ती जा रही है उसको देखते हुए पाकिस्तान के रोल को भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन यह एक वास्तविकता है कि बुरहान वानी के मौत के बाद जनता में आक्रोश बढ़ा है जो सेना के लिए निश्चित तौर पर चुनौती बन कर उभरा है।

सुजात बुखारी के अखबार का नाम राइजिंग कश्मीर था। जिसके नाम से ही कुछ लोगों को नफरत था। सुजात बुखारी बराबर कश्मीर के मुद्दे को अपने कलम के माध्यम से लोगों को वाकिफ कराते रहते थे। जो एक राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी भूमिका निभा रही थी। परंतु कुछ लोग उनके कलम के ताकत को खामोश करने की साजिश सरहद पार से रच रहे थे। वही वीर जवान औरंगजेब को भी लोग नहीं बख्शे। देश की कमान संभालने वाले कंधे और अंगुली दोनों को जख्मी कर मौत के घाट उतार दिया गया। वहीं पुलिस ने बताया कि सुजात बुखारी और उनके दो अंग रक्षकों की हत्या की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी । इसके लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया गया था । पुलिस ने तीनों हत्यारों का स्केच भी जारी किया है । पुलिस के मुताबिक पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। समझ में नहीं आता जो कल तक शब्द कश्मीर की सुंदरता का बखान करने के लिए निकलते थे। आज वही शब्द सिर्फ कश्मीर पर टीका -टिप्पणी और जलता हुआ कश्मीर ऐसे तमाम मुद्दे बनकर निकल रहे हैं।

घाटी जल रही है ,स्वर्ग अपनी सुंदरता खो रहा है। लेकिन सियासी गलियारे की गर्मजोशी 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत के पत्ते भजाने में लगी हुई है। जम्मू कश्मीर में पीडीपी – भाजपा सरकार जिस तरह चल रही थी उसके कारण एक अरसे से दोनों में अलगाव के आसार बढते दिख रहे थे। लेकिन जिस तरह से भाजपा ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लिया। उसके बाद हम यह तो नहीं कह सकते कि घाटी की बिगड़ती हालात के पीछे मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ही रीति-नीति थी। घाटी दोनों सरकार की रजामंदी से चल रही थी या कहें साझेदारी से चल रही थी। यह सब देख कर तो ऐसा लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक रणनीति है अपना असर दिखाने लगी है।

जम्मू कश्मीर में 8 बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। जम्मू कश्मीर में पहली बार 1977 में राष्ट्रपति शासन लगा था । तब कांग्रेस ने शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस से अपना समर्थन वापस ले लिया था।

सारे मुद्दे , सारे नजरियों का वर्णन कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सर्जिकल स्ट्राइक भी सराहनीय है घाटी के हालात को बदलने की कोशिश में। कठुआ रेप कांड हो या पत्थरबाजों की टोली, जरूरी हो गया है अपने ही सरहद पर पनप रहे गद्दारों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने की। उसके बाद सरहद पार की सर्जिकल स्ट्राइक खुद पर खुद हो जाएगी। आतंकी जितना दूसरे देश के खतरनाक नहीं होते हैं उतना अपने देश में बैठे गद्दार खतरनाक होते हैं। जरूरी है वक्त रहते इनका खात्मा करने की चाहे वह कोई भी कठिन कदम हो। जय हिंद जय भारत।

 

  Ankit Kumar Dubeअंकित कुमार दुबे

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

 

 

 

Ankit Kumar Dubey

मैं अंकित कुमार दुबे वाराणसी उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ | मैं वीर रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में मुख्य सलहाकार के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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