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कश्मीर के पीछे पाकिस्तान-2-वीरेंद्र देवांगना

            कश्मीर के पीछे पाकिस्तान-2

गत वर्षों में भारतीय आलावजीर नरेंद्र मोदी के जोर्डन, फिलिस्तीन, यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) और ओमान के दौरे ने साबित किया है कि मुस्लिम मुल्कों से भारत की अच्छी-खासी दोस्ती है। जो पाकिस्तान को निराश करनेवाली है। वह मुस्लिम मुल्कों को भारत के खिलाफ भड़काकर अपना उल्लू सीधा करना चाहता है। दुनिया में उसका यह दलील भी भोथरा साबित होता है कि वह मुसलमानों का खैरख्वाह है। इस लिहाज से देखें तो जितना मुसलमान पाकिस्तान में नहीं रहते, उससे कहीं अधिक मुसलमान धर्मनिरपेक्ष हिंदुस्तान में मजे से रहते हैं।
बावजूद इसके, भारत के कतिपय पाकिस्तानी खिदमदगार और पाक सरकार चाहती हैं कि भारत कश्मीर पर बातचीत की पेशकश करे और वार्ता के टेबल पर आए। जबकि भारत का दो टूक जवाब है कि पाक पहले सरहद पर संधर्ष विराम करे, फिर आतंकवादियों सहित पीओक पर वार्तालाप करे।
यहां समझनेवाला मुद्दा यह कि भारत का कहना है कि जो कश्मीर हमारा है, उसपर हम पाक से क्यों बात करें? वह हमारा मसला है। हम अपने ढंग से निपटाएंगे। जबकि आतंकवाद एक ऐसा मसला है, जो विश्वव्यापी है और भारतीय उपमहाद्वीप सहित समूची दुनिया में चिंता का सबब बना हुआ है।
चंद सिरफिरों की यह दलील हैं कि अच्छा माहौल बनाने के लिए हम पाकिस्तानियों के साथ खेलकूद कर सकते हैं? कलाकारों का आदानप्रदान कर सकते हैं। फिल्म बना सकते हैं। क्या यह तर्क देशद्रोह से कमतर नहीं है? इधर हमारे सिपाही और सरहद के वाशिदें पाकिस्तानी गोली का रोज शिकार होकर परिवार और बीवी-बच्चों को जीवनभर का दर्द दे रहे हों और उधर बैरी मुल्क के खिलाड़ियों और कलाकारों के साथ मनोरंजन करते फिरे; यह दोगली मानसिकता है। ऐसी दोहरी मानसिकता से फौजियों की शहादत का अपमान होता है।
इधर अमेरिकी घुड़की से पाकिस्तानी हुक्मरानो ंके हौसले पस्त हैं। अमेरीका की धमकी है कि वह उसको दिया जानेवाला आर्थिक सहायता बंद करनेवाला है; क्योंकि उसने अफगानिस्तान में तबाही मचानेवाले हक्कानी और तालिबानी नेटवर्क के खिलाफ कोई सार्थक कदम नहीं उठाकर उसे बेवकूफ बनाया है। इससे पाक के सारे आतंकी सरगना सकते में हैं।
भारत सरकार को इस मौके का भरपूर फायदा उठाना चाहिए कि वह पाकिस्तान को पहले चेतावनी दे, फिर उसको आतंकी राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव पासकर उससे सारे संबंध तोड़ ले और दुनिया के तमाम मुल्कों से भी ऐसा करने की पुरजोर अपील करे। इस बाबत संसद में प्रस्ताव लाए जाने से यह भी प्रमाणित हो जाएगा कि कौन-सी पार्टी आतंकिस्तान के साथ है और कौन सी नहीं? देशवासी उनके दोगलेपन को स्पष्टतौर पर देख-समझ सकेंगे।
अकडू पाकिस्तान के लिए 23 फरवरी 2018 चुल्लूभर पानी में डूब मरने का दिन था। इस दिन फ्रांस की राजधानी पेरिस में वैश्विक संस्था-फाइनेंनशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को पुख्ता सबूत के आधार पर ‘ग्रे लिस्ट’ में डालकर उसको उसकी औकात दिखा दिया है।
एफएटीएफ वैश्विक वाचडाग के अंतर्गत ‘ग्रे लिस्ट’ में उन मुल्कों को शामिल करता है, जिनके खिलाफ ग्लोबल उग्रवाद को सैन्य व आर्थिक सहायता प्रदान करने के ठोस साक्ष्य मौजूद होते हैं। यह संस्था 1989 में तब अस्तित्व में आया, जब दुनिया के सामने आतंकवाद विध्वंसक चुनौती के रूप में उभरा। पाक साल 2013-2015 से ही ‘ग्रे लिस्ट’ में शुमार था। लेकिन, उसके हुक्मरानों के द्वारा विश्व को यह भरोसा दिलाने के बाद कि वह भविष्य में आतकवाद से तौबा कर लेगा; उसको ‘ग्रे लिस्ट’ से हटा दिया गया था।
इसके बावजूद पाकिस्तान नहीं सुधरा। वह दुनिया से खासकर उसके रहमदाता एवं रकमदाता अमेरिका से दगा किया। वस्तुतः अमेरिका यह चाहता था कि पाकिस्तान अपने सरजमीं पर पनप रहे आतंकी गुटों पर कार्रवाई करे। विशेषकर अफगानिस्तान में तबाही मचानेवाले तालिबानी और हक्कानी नेटवर्क को तोड़े। परंतु, पाक आर्थिक सहायता डकारता रहा और अमेरिका को कार्रवाई के नाम पर धोखा देता रहा।
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