कथासार-हेमा पांडे

कथासार-हेमा पांडे

जब कोई कथा केवल कथा रूप में पड़ी जाती है तो आप उस कथा की मूल रहस्य और सारगर्भित बातों को भूल जाते हैं. आज मैं आपके सामने मां शेरावाली की एक छोटी सी कहानी लिखने जा रही हूं. आशा है .आप को पढ़ने में आनंद के साथ ,थोड़ी जानकारी और मां शेरावाली के प्रति, थोड़ी भक्ति जरूर जागृत होगी .जब प्रलय के पश्चात सेष सैया पर योग निद्रा में निमग्न विष्णु के कमल से मधु और कैटभ नाम के दो असूल उत्पन्न हुए और वे श्रीहरि के नाभि कमल पर स्थित ब्रह्मा को मारने के लिए उद्धत हो गए. तब ब्रह्मा ने भगवती योग निद्रा की स्तुति करते हुए उनसे 3 प्रार्थना की .भगवान विष्णु को जगा दीजिए. उन्हें दोनों असुरों के संहारक उद्धत कीजिए . और असुरों को भी मोहित कर श्री भगवान द्वारा उनका बध करवाइए. तब भगवती ने ब्रह्मा को दर्शन दिया .भगवती योग निद्रा के प्रभाव से उठकर भगवान उन दोनों से युद्ध करने लगे. दोनों असुरों ने योग निद्रा द्वारा मोहित कर दिए जाने पर भगवान से वर मांगने को कहा ,अंत में उसी वरदान के अनुसार भगवान विष्णु द्वारा मारे गए . यह तो था पहला चरित्र और दूसरा चरित्र देखी . प्राचीन काल में महिषी नामक एक महाबली ने जन्म लिया. वह अपने अदम्य शक्ति से, इंद्र ,सूर्य ,चंद्र ,वरुण, अग्नि, वायु तथा अन्य सभी देवों को पराजित कर इंद्र बन बैठा .और सभी देवों को स्वर्ग से निकाल दिया .स्वर्ग सुख से वंचित देव मृत्यु लोक में भटकने लगे. अंत में उन लोगों ने ब्रह्मा के साथ भगवान विष्णु और शिव के निकट पहुंच कर अपनी कष्ट कथा सुनाएं. देवकी करुण कहानी सुनकर हरि हर के मुख से एक महान तेज निकला. तत्पश्चात ब्रह्मा सूर्य मुनि के शरीर से भी तेज मिले .और वह तेज एकत्र होकर. एक दिव्य देवी के रूप में परिणित हो गया विधि हरि और हर त्रिदेव आधार ब्रह्मा विष्णु और महेश ने तथा अन्य प्रमुख देवों ने उसके जो मूर्ति को अपने अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए तब देवी 28 को सुनकर सूर्यराज संपूर्ण असुरों के साथ उस शब्द की ओर दौड़ पड़ा वहां पहुंच कर उसने उग्र स्वरूपा देवी को देखा तो वे सभी असुर देवी से युद्ध करने लगे .भगवती और उनके वाहन सिंह ने कई कोटी असुरों का विनाश कर दिया .भगवती के चारों असुर के 15 सेनानी जो जो एक महान दानव थे .15 ओं का वध किया देवी ने .उसके बाद महिषी मनुष्य रूप में आया और शेरावाली मैया से युद्ध करने लगा. युद्ध करते करें अंत में मारा गया .अपने समस्त शत्रुओं के मारे जाने पर प्रसन्न हो. देवे ने आदिशक्ति की स्तुति की और वर मांगा कि हम. लोग जब जब दानव द्वारा बिपता ग्रस्त हो ,तब तब आप हमें आपदाओं से विमुक्त करें. तथा सदा हमारे साथ साथ रहे.

 

 

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