कायाकल्प-हेमा पांडे

कायाकल्प-हेमा पांडे

कायाकल्प का मतलब है उस सदाबहार तरोताजगी अद्वितीय सुंदर और उस मस्ती से है जो जीवन में आनंद का बीज बोदे .60 वर्ष के वृद्ध को भी 16 वर्षीय पूर्व सौंदर्य प्रदान कर दें. क्योंकि व्यक्ति तन से भी अधिक मन पर थोपे गए विचारों से बुडा हो जाता है . सारा सौंदर्य ही ढल जाता है . जीवन में इस आनंद का होना ही सौंदर्य वृद्धि है. सौंदर्य तो आधार है जीवन का ईश्वर का दिया हुआ वरदान है. जिसका तात्पर्य प्राप्त होना जीवन की श्रेष्ठता पूर्णता कहीं गई है. जितने भी ग्रंथ वेद पुराण लिखे गए हैं उन सब में सौंदर्य का विस्तृत विवेचन हुआ है सुंदर होना सुंदर दिखना सुंदरता का सम्मान करना उसकी प्रशंसा और सराहना करना मानव का धर्म है .मैंने अपनी जीवन में अनेकों ऐसे सुंदरियों को देखा है कि जो सुंदर होते हुए भी एक नॉर्मल जिंदगी जीती हैं. उनकी महानता है .सौंदर्य किसी नारी अप्सरा या प्रकृति का नाम नहीं है वह तो केवल सौंदर्य के प्रतिमान है जिसे देख कर आप अपने आपको चिंता मुक्त अनुभव करने लगेंगे और आनंद की स्थिति उत्पन्न होने लगे सही अर्थों में वही सौंदर्य है. आज सौंदर्य प्रसाधनों के माध्यम से हर व्यक्ति सोनदय बने रहने का प्रयास करता है .तरह तरह के विटामिंस खाता है सौंदर्य विशेषज्ञ भी सौंदर्य का स्थाई हल ढूंढने के प्रयास में लगे हैं किंतु आज तक स्थाई उपाय प्राप्त करने में असफल ही है हां यह जरूर है कि सर्जरी के माध्यम से चेहरे और शरीर की झुर्रियां को समाप्त करने में सफल हुए हैं किंतु यह चिकित्सा आती है और अत्यंत कष्ट है इसे अपनाना प्रत्येक व्यक्ति की सामर्थ्य की बात नहीं है. उपाय उपाय उन लोगों ने बहुत पहले ही ढूंढ निकाला है हमारे प्राचीन ऋषि धन्वंतरि ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने पूरे जीवन के इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु लगा दिया जीवन में हास्य विनोद आनंद भक्ति प्राप्त हो जाना कोई सामान्य सी बात नहीं है यह तो जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है जिसे प्राप्त करने के लिए बड़े-बड़े ऋषि मुनियों ने कठिन से कठिन तप किए हैं तब जाकर वह लाए हैं और यह दिखा दिया कि यदि व्यक्ति विश्वास हो तो बता साधना के बल पर क्या कुछ नहीं कर पाता ऐसा होता होगा तो उसके चेहरे पर एक एक एक और एक 11 आह्लाद एक प्रसन्नता स्वता ही लगने लग जाएगी और यही तो वास्तविक सौंदर्य है .हमें अपने शरीर के अंदर के सौंदर्य को बाहर निकालना है ना कि चेहरे पर लीपापोती करके अपने को सुंदर दिखाना है हमें अपने मन को सुंदर बनाना है ना कि तन को. कीरत अधिक दिन तक चलती है सूरत ज्यादा दिन तक नहीं चलती .कीरत से ही आदमी महान बन सकता है सूरत तो आखिर एक दिन चली जाना है इसलिए आदमी को अपने विचार अपनी आत्मा को सुंदर बनाना है और इसी तरह अपनी कायाकल्प करते रहना है.

Hema Pandey

 

हेमा पांडे

 

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