माता की कथा- हेमा पांडे

माता की कथा- हेमा पांडे

बहुत समय पहले शुंभ और निशुंभ नामक दो पराक्रमी असुर हुआ करते थे. उन्होंने युद्ध में इंद्र को परास्त कर उसका राज्य तक छीन लिया. वे दोनों सूर्य ,चंद्र ,कुबेर ,याम ,वरुण और अग्नि के अधिकारों के भी अधिपति बन बैठे. सभी देवता शोक ग्रस्त हो मृत्यु लोक में आए और हिमालय पर जाकर माता भगवती के सामने प्रार्थना करने लगे. तब माता पार्वती ने कहा हे देव आप किसकी स्तुति कर रहे हैं. उसी समय देवी के शरीर से शिवा निकली और कहने लगी : शुंभ निशुंभ से पराजित होकर स्वर्ग से निकाले गए ए इंद्रा दी देव मेरी आदिदेव मेरी स्तुति कर रहे हैं. तभी पार्वती के शरीर से निकलने के कारण अंबिका कौशिकी कहलाए और पार्वती कृष्ण वर्ण हो गई तथा काली नाम से हिमालय पर रहने लगी. इधर परम सुंदरी अंबिका को, शुंभ निशुंभ के भाई चंड मुंड ने देखा तो दोनों ने जाकर शुंभ से उसके अतुल्य सौंदर्य की प्रशंसा की. भाइयों की बात सुनकर शुंभ सुग्रीव नामक असुर को अंबिका को ले आने के लिए कहा. सुग्रीव ने भगवती के पास पहुंचकर शुंभ निशुंभ के शौर्य की प्रशंसा करते हुए उनसे विवाह करने का प्रस्ताव रखा. देवी ने उत्तर दिया जो मुझे संग्राम में परास्त करेगा. मैं उसी को पति रूप में स्वीकार करूंगी ,यही मेरी अटल प्रतिज्ञा है. सुग्रीव ने शुंभ निशुंभ के पास पहुंचकर भगवती अंबिका की प्रतिज्ञा कह सुनाई तो . असुर ने कुपित होकर देवी के बाल पकड़ कर खींच लाने के लिए धूम्रलोचन नाम के असुर को भेजा. देवी ने तो पुकार मात्र से ही उसे भस्म कर दिया. फिर चंड मुंड ने एक विशाल सेना के साथ भगवती के साथ युद्ध छेड़ दिया . भगवती को पकड़ने का प्रयत्न करने पर उनके ललाट से भयानक काली देवी प्रकट हुई, जिन्होंने असुर सेना का विनाश कर दिया ,और चंड मुंड का सिर काटकर वे अंबिका के पास ले गई. इसी कारण उनका नाम चामुंडा भी पड़ा. चंड मुंड वध सुनकर शुंभ निशुंभ, बल से पुन मत होकर . देवी की अवहेलना करके ,युद्ध स्थल में सेना सहित आ डटे. भगवती ने दैवीय शक्तियों की सहायता से, असुर सैन्य का संहार प्रारंभ कर दिया. तब असुर सेनाध्यक्ष रक्तबीज भगवती और देव शक्तियों से युद्ध करने लगा .उसके शरीर से जितनी रक्त गिरते ,धरती पर उतने ही रक्तबीज और उत्पन्न हो जाते. अंत में देवी ने चामुंडा को आज्ञा दी कि वह अपने मुख में इन सब के रक्त को ले ले ,और इस तरह उन् असुरों का भक्षण कर डाले .चामुंडा ने ऐसा ही किया और भगवती ने उस असुर का सिर काट दिया .तत्पश्चात निशुंभ भगवती से युद्ध करने लगा और मारा गया . तब सुमभ ने क्रोधित होकर अंबिका से कहा तू दूसरे का बल् लेकर अभिमान कर रही है .भगवती ने उत्तर दिया, मैं एकमात्र प्रकृति का कारण व और प्रलय का स्वरूप हूं ,सब शक्तियाँ मेरे द्वारा ही हुई है. और सारी स शक्तियां मेरी अंदर ही समाहित हुई है, एक रूप होते हुए भी मैं संसार में अनेकों रूप में विद्यमान हूं..

 

 Hema Pandey

     हेमा पांडे

 

 

1+
comments

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account